राहु 18 वर्ष बाद फिर आ गए रोहिणी नक्षत्र में, जाने इसके प्रभाव को

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मंगल ग्रह फरवरी माह के 22 फरवरी को वृषभ राशि में आए है जबकि राहु (Rahu)पहले से ही वृषभ राशि में है। ज्योतिषास्त्र के ग्रंथों में वृषभ राशि में स्थित रोहिणी नक्षत्र में पाप ग्रहों जैसे शनि, मंगल, राहु और केतु के गोचर को बेहद अनिष्टकारी और विशेषरूप से भारत के लिए उथल-पुथल लाने वाला कहा गया है।

वृषभ राशि में 10 अंश से 23 अंश 30 कला तथा रोहिणी नक्षत्र (Rohini Nakshtra)की स्थिति कहीं जाती है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि मेष से मीन तक 12 राशियों में कुल 27 नक्षत्र है। लेकिन इनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण रोहिणी नक्षत्र है जिससे चंद्रमा सबसे अधिक प्रेम करता है

बड़ी आपदओं का संकेत है यह

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में रहते हुआ था। रोहिणी नक्षत्र में पाप ग्रहों का गोचर जनता को बेहद कष्ट देने वाला होता है। अभी हाल ही में 13 फरवरी को राहु ने रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया है। जहां वह आगामी 20 सितंबर तक गोचर करेंगे।

वृष राशि में राहु का गोचर भारत के लिए शुभ नहीं रहा हैं 1947 में देश का विभाजन के समय साम्प्रदायिक तनाव,1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध, वर्ष 1984 में आॅपरेशन ब्लू स्टार और तत्कालीक प्रधानमंत्री इंदिरा

गांधी की हत्या तथा 2002 के गुजरात दंगों के समय भी राहु वृष राशि में गोचर कर रहे थे। वृष राशि में राहु का गोचर प्रत्येक 18 वर्ष के अंतराल पर कोई बड़ी विपदा लेकर आता है।

मार्च व अप्रैल संवेदनशील होने की संभावना

वृषभ राशि में गोचर कर रहे मंगल आगामी 12 मार्च से 3 अप्रैल के बीच रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते हुए राहु से युति करेंगे। यह समय विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उथल-पुथल के कारण भारत के लिए कष्टकारी हो सकता है।

मंगल जब 24 मार्च को रोहिणी नक्षत्र के मध्य में 17 अंश पर पहुंचेंगे तब उत्तर भारत में किसी अप्रिय घटना से तनाव पैदा हो सकता है। जिससे सरकार को कानून व्यवस्था की स्थिति संभालने में मुश्किल हो सकती है।

किसान आंदोलन के ओर अधिक उग्र होने तथा महंगाई के बढ़ने के भी योग बन रहे है। राहु 13 अप्रैल को रोहिणी नक्षत्र के मध्य में 17 अंश पर पहुंचकर स्थिति को अधिक विकट बनाएंगे। पश्चिम बंगाल, केरल और असम के विधान सभा चुनाव में विचित्र स्थिति देखने को मिलेगी।

26 मई को चंद्रग्रहण करेगा प्रभावित

रोहिण नक्षत्र में मंगल और राहु का गोचर मार्च के मध्य में तेजी से गर्मी बढ़ा देगा जिससे उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से अधिक तापमान रहेगा। राहु के रोहिणी में गोचर के चलते इस वर्ष मानसून असामान्य रहेगा। जिसके कारण कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ आने से किसानों को कष्ट पहुंचने के योग बन रहे है।

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