गोधाम में नंदी की पूजा-अर्चना कर मनाया गया पोरा पर्व

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बिलासपुर- बिलासपुर गौ धाम में मंगलवार को पोला का पर्व मनाया गया। विधि-विधान से गौ वंश व नंदी की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान गौकथा वाचक गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने कहा कि किसी भी राज्य की सार्थक पहचान उनकी संस्कृति से होती है। जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य भारत देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जो पूर्णतः कृषि कार्य प्रधान राज्य है। यहाँ के निवासी पूरे वर्ष भर खेती कार्य में लगे रहते है। धान की खेती यहाँ की प्रमुख फसल है।

यहाँ के निवासियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को कुछ इस तरह संजोकर रखा है, कि कृषि कार्यो के दौरान साल के विभिन्न अवसरो पर खेती कार्य आरंभ होने के पहले अक्ती, फसल बोने के समय सवनाही, उगने के समय एतवारी भोजली, फसल लहलहाने के समय हरियाली लोक पर्व है।

इन अवसरों व ऋतु परिवर्तन के समय को धार्मिक आस्था प्रकट कर पर्व.उत्सव व त्योहार के रूप मे मनाया जाता है। साथ ही जनमानस मे एकता का संदेश देते है। यहाँ के निवासी पेड़.पौधों, जीव.जंतुओं तथा प्रकृति को भी भगवान की ही तरह पूजा करते है।

बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन का

पोला पर्व के अवसर पर तरह तरह के व्यंजन बनाए जाते है। पोला को छत्तीसगढी मे पोरा भी कहते है। पोला पर्व में बैलो के श्रृँगार व गर्भ पूजन किया जाता है। किसान अपने गौमाता व बैलों को नहलाते धोते है । उनके सीग व खूर मे पेन्ट या पालिस लगाकर कई प्रकार से सजाते है। गले मे घुंघरू, घंटी या कौडी से बने आभूषण पहनाते है।

तथा पूजा करके आरती उतारते है। गोधाम में गौसेवको ने भी धर्म रुपी बैलो की पूजा-अर्चना कर मनाया। पोला पर्व सभी गौवंशो को खिलाया गया विशेष पकवान। इस अवसर पर गौसेवक विपुल शर्मा, मुकेश कश्यप, रवि ताम्रकार, बसंत, पिंटू यादव, कृष्णा सहित गौ सेवक उपस्थित रहे।

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