देर रात तक गुदगुदाते रहे कवि, हास्य कवि सम्मेलन में देर रात तक जमे रहे लोग

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कला एवं साहित्य सृजन परिषद लखराम के तत्वावधान में हास्य कवि सम्मेलन द्वितीय वर्ष का आयोजन सम्माननीय महेंद्र साहू जी कार्यक्रम प्रमुख आकाशवाणी बिलासपुर के मुख्य आतिथ्य एवं ज्योति कामलसेन जनपद सदस्य, बबिता वर्मा सरपंच ग्राम पंचायत लखराम के विशिष्ट आतिथ्य में बस स्टैंड लखराम में सम्पन्न हुआ।

हास्य कवि सम्मेलन की शुरुवात अतिथियों एवं आमंत्रित कवियो द्वारा नवनिर्मित माता के मंदिर में पूजा-अर्चना से हुआ। तत्पश्चात मंचासिन अतिथियो एवं आमंत्रित कवियो का शाल श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रमुख अभ्यागत श्री साहू जी ने आयोजन की सराहना करते हुए ऐसे साहित्यिक आयोजन करते रहने की बात की।

जनपद सदस्या ज्योति कामलसेन ने आयोजन समिति को बधाई देते हुये, कवियो को शुभकामनाएं दी। तत्पश्चात हास्य कवि सम्मेलन की शुरुवात बिलासपुर से पधारे छत्तीसगढ़ी गीतकार मनोहर दास मानिकपुरी के छत्तीसगढ़ी गीत मैं रइथव गंवाई गाँव म मोर नाव हे गंवईहा से हुई जिसे लोगो का भरपूर आशीर्वाद मिला।

अगले क्रम में सक्ति से पधारे युवा कवि जयेंद्र कौशिक ने अपने चिरपरिचित अंदाज में माहिया एवं छंद से लोगो को हाथ खोलने पर मजबूर कर दिया। इनके द्वारा पिता पर प्रस्तुत मार्मिक गीत बेच स्वयं को लाय खिलौने, रहे सँजोते ख़्वाब सलोने, खुद को हिस्सो में है बाँटा, मुस्काये जो सहकर घाटा, जीवन के पतझड़ पे, छाते बनके जो मधुमास, पिताश्री आप जलद मैं प्यास को लोगो ने बहुत पसंद किया।

माँ नर्मदा की पावन भूमि पेंड्रा से पधारे ओज के शसक्त हस्ताक्षर आशुतोष आनंद दुबे की ओजपूर्ण वंदना ने पूरे सदन की वाहवाहीँ लूटी, माँ भारती की रक्षा के लिए डटे हुए वीर जवानों पर पंक्तियां अदब से पेश आने का सलीका सीख जाओगे, चुकाना कर्ज है कैसे जमीं का सीख जाओगे, शहीदों के घरों में एक दिन भी रहके देखोगे, वतन से प्यार करने का तरीका सीख जाओगे पर लोगो ने इस युवा कवि को भरपूर आशीर्वाद दिया।

तोरवा बिलासपुर से आये छत्तीसगढ़ी के गीतकार राधेश्याम पटेल की छत्तीसगढ़ी गीतों ने शमा बांध दिया। इनके फाल्गुन गीत हंस गोठिया ले जिवरा जुड़ा ले, बड़ ताकत हे पिंयार मा, रंग लगाले मयां बढ़ा ले होरी के तिहार मा को लोगो का भरपूर आशीर्वाद मिला। अगले क्रम में हास्य के युवा कवि बालमुकुंद श्रीवास ने लोगो को खूब हंसाया।

पति पत्नी और राजनीति पर व्यंग को सुनकर लोग लोटपोट होते रहे। इनकी हास्य व्यंग्य की कविता चिरहा ओनहा फेसन बनगे, सगरी काया झाँकय, बड़का ओनहा नाने होंगे, मनखे रइ रइ ताकय को सुनकर लोगो ने अपना भरपूर आशीर्वाद दिया। इस पूरे आयोजन के संयोजक, संचालक एवं लखराम के बेहद लोकप्रिय साहित्यकार दीनदयाल यादव जी ने अपने हास्य व्यंग्य की चुटकियो से लोगो को खूब हंसाया।

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इनके पति पत्नी और नेताओं पर हास्य रचनाओं ने लोगो को देर रात तक उठने नही दिया। इनकी हास्य कविता चीन तय काबर बोरियाथस, हम जानत हन तय चमगीदरी खाथस ने खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का सफल संचालन दीनदयाल यादव ने एवं आभार प्रदर्शन बलराम विश्वकर्मा ने किया।

हास्य कवि सम्मेलन को सफल बनाने सूरज देवांगन, दिव्येश यादव, गणेश यादव, रवि साहू, सुरेंद्र, प्रह्लाद, कन्हैया साहू, बलराम विश्वकर्मा, रामकुमार केंवट, अशोक साहू, प्रमोद यादव, नीलेश यादव, कमलेश देवांगन, मुन्ना केंवट, संजय देवांगन का विशेष सहयोग रहा।

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