14 विविध भाषाओं में हुआ काव्यपाठ, भारतमाता पूजनोत्सव सम्पन्न

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बिलासपुर.कला एवं साहित्य के लिए समर्पित अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती की बिलासपुर इकाई एवं महाराष्ट्र मंडल नेहरू नगर के संयुक्त तत्वावधान में भारतमाता पूजनोत्सव के उपलक्ष्य में विविध भारतीय भाषाओं में आँचलिक कवि सम्मेलन का आयोजन डॉ.रवि प्रकाश दुबे जी कुलपति डॉ सीवी रमन विश्वविद्यालय कोटा के मुख्य आतिथ्य, डॉ. विनय कुमार पाठक शिक्षाविद एवं पुर्व अध्यक्ष राजभाषा आयोग

छत्तीसगढ़ की अध्यक्षता एवं मोहन देवपूजारी जी अध्यक्ष महाराष्ट्र मंडल नेहरू नगर, सुलभा देशपांडे अखिल भारतीय सहकार्यवाहिका, डॉ कल्पना शर्मा नागपुर के विशिष्ट आतिथ्य में महाराष्ट्र मंडल, पारिजात कालोनी नेहरू नगर में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुवात परंपरा अनुसार भारत माता की पूजा-अर्चना, दीप प्रज्ज्वलन एवं आरती के साथ हुआ। आरती का सस्वर वाचन तेजस्विनी छात्रावास की स्वयंसेविकाओं द्वारा किया गया।

आरती गायन के दौरान शहर की पेंटिंग आर्टिस्ट बरखा आहूजा कोटवानी ने माँ भारती की सुंदर छवि कैनवास पर बनाई। जिसे लोगो ने खूब सराहा। तत्पश्चात अतिथि स्वागत के उपरांत ध्येय गीत का गायन शाम्भवी पागे द्वारा की गई। इकाई के संयोजक विश्वनाथ कश्यप द्वारा भूमिका के रूप में संस्कार भारती में साल भर हुए विभिन्न आयोजनों का एक वृत्त प्रस्तुत किया गया।

साथ ही संस्था के आगामी आयोजनों के संदर्भ में भी उन्होंने अपनी बात रखी। भूमिका के पश्चात राष्ट्र सृजन मंच द्वारा विश्वनाथ कश्यप को कोरोनाकाल मे उनके द्वारा किये उत्कृष्ट कार्य के लिए कोरोना कर्मवीर सम्मान से सम्मानित किया गया। आँचलिक कवि सम्मेलन में 14 विविध भारतीय भाषाओं में अंचल से आये हुए रचनाकारों ने राष्ट्रीयता पे अपनी भावाभिव्यक्ति कविता के रूप में प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीयता एवं जन, गढ़, मन की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित इस आँचलिक कवि सम्मेलन की शुरुवात राष्ट्र भाषा हिंदी से की गई। जिसे प्रस्तुत किया वरिष्ठ कवि विजय तिवारी ने, इसके पश्चात संस्कृत में काव्य पाठ के लिए युवा रचनाकार सौरभ टिकेकर को आमंत्रित किया गया।

राजभाषा छत्तीसगढ़ी में काव्यपाठ के लिए वरिष्ठ कवि सनत तिवारी को आमंत्रित किया गया। तत्पश्चात केवल कृष्ण पाठक ने पंजाबी में काव्यपाठ कर खूब वाहवाही लुटी। प्रकाश माधवानी ने सिंधी भाषा मे काव्य पाठ कर लोगो का मन मोह लिया। इसी कड़ी में गुजराती भाषा मे डॉण् संजय मेहता, मराठी में अपर्णा दांडेकर, मलयालम में डॉ सुप्रिया

भारतीयन, तमिल में गीता गणेशन, कन्नड़ में रमा नायडू, तेलगु में वसंता लक्ष्मी उर्दू में मारिया शामिन अली, ओड़िया में मानस कुमार रथ, बंगाली में प्रसेनजित मजूमदार ने काव्य पाठ कर इस अनूठे आयोजन को एक नई ऊंचाई दी।

कार्यक्रम के संदर्भ में आयोजन के प्रमुख अभ्यागत डॉ.रविप्रकाश दुबे ने संस्कार भारती द्वारा आयोजित इस आयोजन की मुक्त कंठ से तारीफ करते हुए कहा कि राष्ट्रीयता को ध्यान में रखकर विविध भाषाओं में कवियो द्वारा काव्यपाठ प्रशंसनीय हैए उन्होंने अपने विश्विद्यालय में भी इस तरह के विविध भाषाओं में आयोजन करने की इच्छा जाहिर की।

भाषाविद एवं पूर्व राजभाषा आयोग अध्यक्ष डॉ विनय कुमार पाठक ने आयोजको को बधाई देते हुए कहा कि संस्कार भारती संस्कृति के संरक्षण में जो कार्य कर रही है वो अद्भुत है। हम अपने बच्चो को संस्कार दे ये बेहद आवश्यक हैं।

उन्होंने चित्रकारी करने वाली बरखा आहूजा को भी बधाई देते हुए उनकी प्रशंसा की। नागपुर से विशेष रूप से आई डॉ.कल्पना शर्मा ने कहा कि विविध भाषाओं के रचनाकारों को जोड़कर इस वृहद आयोजन की जितनी तारीफ की जाए कम हैए उन्होंने कला के माध्यम से संस्कार को पुष्पित एवं संरक्षित करने के लिए संस्कार भारती को बधाई भी दी।

उद्बोधन पश्चात आमंत्रित सभी रचनाकारों को स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का विधिवत समापन वंदेमातरम गीत के साथ हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन अनु चक्रवर्ती ने एवं आभार इकाई के अध्यक्ष अनिल गढ़ेवाल ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने शिरीष पागे, दिलीप पात्रिकर, विनीता भावनानी, भुनेश्वर चन्द्राकर, चंद्रशेखर देवांगन, विपिन वर्मा, योगेश करंजगावकर, राजकुमार पांडेय, धनेश्वरी सोनी,

आशा कश्यप, माया चन्द्राकर, राघवेंद्र दुबे, गीता नायक, रेखराम साहू, गोपाल कक्कड़, कमलेश पाठक, सुषमा पाठक, मयंक मणि दुबे, पूर्णिमा तिवारी, एम डी मानिकपुरी, राजेश सोनार, प्रकाश बावरे, गोपाल दास अग्रवाल, अश्वनी पांडेय, बसंत पांडेय,

डॉ.अभिषेक जैन, शैलेन्द्र गुप्ता, एस. विश्वनाथ राव, अपर्णा दांडेकर, शैलजा, मुस्कान, शुभांगी, अनुश्री, रंजना, ज्योति, पूनम, सुलभा थानेकर, डॉ.कमल किशोर, अरुण, आलोक, सतीश, बी के चतुर्वेदी, किरण येरी एवं शहर के अन्य गणमान्य रचनप्रेमी विशेष रूप से उपस्थित थे।

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