श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान को ऐसे करे प्रसन्न, पढ़े पूरा लेख

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस वर्ष दो दिन मनाया जाएगा। तिथियों व पंचागों की गणना के चलते यह भेद शैव व वैष्णव सम्प्रदाय के मुताबिक मनाया जाता है। इस लेख के माध्यम से हम श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हुए जन्माष्टमी में क्या करे उसकी जानकारी देंगे।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पूरी दुनिया में परंपरागत उत्सव के रूप में मनाता है। श्याम, गोविंद, मुरारी, मुरलीधर, कान्हा, श्रीकृष्णा, गोपाल, घनश्याम, बाल मुकुंद, गोपी मनोहर जाने कितने खूबसूरत और सुहाने नामों से पुकारे जाते है। इनकी पूजा-अर्चना कर इन्हें बहुत ही सरल ढंग से प्रसन्न किया जा सकता है।

भगवान विष्णु के आठवें अवतार

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी की तिथि पर हर वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी है। भगवान विष्णु के आठवें अवतार है श्रीकृष्ण। अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र के योग में इनका जन्म हुआ था। जन्माष्टमी पर लोग कान्हा जी के बाल स्वरूप की पूजा करते है। कई लोग अपने घरों में बाल गोपाल रखते है। बाल गोपाल की पूजा और सेवा एक छोटे बच्चे की भांति की जाती है। मान्यता है कि लड्डू गोपाल की सेवा से घर की सभी परेशानियां दूर हो सकती है। लड्डू गोपाल की सेवा से घर की सभी परेशानियां दूर हो सकती है। लड्डू गोपाल के प्रसन्न होने से व्यक्ति का मन बहुत प्रसन्न रहता है। लड्डू गोपाल भाव के भूखे होते है।

ऐसे करे श्रीकृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करना है तो उनकी पूजा विधि-विधान से करनी होगी। इसके लिए सबसे पहले चैकी पर लाल कपड़ा बिछा लीजिए। फिर उस पर श्रीकृष्ण की मूर्ति को एक पात्र में रखे। उसके बाद दीपक जलाएं और साथ ही धूपबत्ती भी जला लीजिए। भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करे कि हे भगवान कृष्ण कृपया पधारिए और पूजन ग्रहण कीजिए। फिर श्री कृष्ण को पंचामृत से स्नान कराएं। गंगाजल से स्नान कराए। अब भगवान को वस्त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करे। भगवान को दीप दिखाएं। इसके बाद धूप भी दिखाएं। अष्टगंध चंदन या रोली का तिलक लगाएं और साथ ही अक्षत भी तिलक पर लगाए। माखन, मिश्री और अन्य भोग सामग्री अर्पण कीजिए। तुलसी का पत्ता विशेष रूप से अर्पण कीजिए साथ ही पीने के लिए गंगाजल रखे।

इस तरह करे श्रीकृष्ण का ध्यान

श्रीकृष्ण बच्चे के रूप में पीपल के पत्ते पर लेटे है। उनके शरीर में अनंत ब्रम्हाण्ड है और वे अंगूठा चूस रहे है। इसके साथ ही श्रीकृष्ण के नाम का अर्थ सहित बार-बार चिंतन कीजिए। कृष् का अर्थ है आकर्षित करना और ण का अर्थ है परमानंद या पूर्ण मोक्ष। इस प्रकार कृष्ण का अर्थ है वह जो परमानंद या पूर्ण मोक्ष की ओर आकर्षित करता है। वही कृष्ण है। मैं उन श्री कृष्ण को प्रणाम करती हूं वे मुझे अपने चरणों में अनन्य भक्ति प्रदान करे। विसर्जन के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर चैकी पर छोड़े और कहे हे भगवान कृष्ण पूजा में पधारने के लिए धन्यवाद।

मनोकामना पूर्ण करने वाली है जन्माष्टमी

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार किसी भी सिद्धि या मनोकामना को पूरा करने के लिए चार रात्रियां सबसे उत्तम मानी गई हैं। इनमें पहली कालरात्रि है जिसे नरक चतुर्दशी या दीपावली कहते है। दूसरी अहोरात्रि या शिवरात्रि है। तीसरी दारूणरात्रि या होली है और अंतिम है मोहरात्रि या जन्माष्टमी।

मां लक्ष्मी भी होती है प्रसन्न

शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण की पत्नी रूकमणी मां लक्ष्मी का अवतार थी अतः अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती है और भक्तों पर कृपा बरसाती है। यदि जन्माष्टमी के दिन ये उपाय पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास से करेंगे तो आपको विशिष्ट फल की प्राप्ति होगी।

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