पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का समापन , ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से सभी से मांगी क्षमा

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बिलासपुर. पर्यूषण पर्व के पश्चात सकल जैन समाज द्वारा क्षमावाणी का ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण मनमोहक प्रस्तुति सरकण्डा मन्दिर से पुजारी मनोज जैन,

उनके बच्चों सरस और सम्यक द्वारा की गई। क्षमावाणी के पावन अवसर पर बुरहानपुर से श्री अखिल

भारतवर्षीय दिगम्बर जैन विद्वत्परिषद के महामंत्री डॉ. सुरेन्द्र कुमार जैन भारती ने अपने उदबोधन दिया।

उन्होंने बताया भारत की प्राचीन श्रमण संस्कृति की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण जिन परम्परा ने क्षमा को पर्व के रूप में प्रचलित किया है।

जैनों के प्रमुखतम पर्व में क्षमापर्वष् है। इसे क्षमावाणी भी कहते हैं। विश्व के इतिहास में यह पहला पर्व है।

जिसमें शुभकामना, बधाई, उपहार न देकर सभी जीवों से अपने द्वारा जाने.अनजाने में किए गए समस्त

अपराधों के लिए क्षमायाचना करते हैं। क्षमा करने और क्षमा माँगने के लिए विशाल हृदय की आवश्यकता होती है।

तीर्थंकरों ने सम्पूर्ण विश्व में शांति की स्थापना के लिए सूत्र दिया है खम्मामि सव्वजीवाणं, सव्वे जीवा खमंतु

मे। मित्ती मे सव्वभूदेसु, वेरं मज्झम ण केणवि।

अर्थात मैं सभी जीवों को क्षमा करता हूँ। सभी जीव मुझे भी क्षमा करें। मेरी सभी जीवों से मैत्री है। किसी के साथ

मेरा कोई वैर भाव नहीं है

क्षमावणी का पर्व सौहार्द, सौजन्यता और सद्भावना का पर्व है। आज के दिन एक दूसरे से क्षमा मांगकर मन की

कलुषता को दूर किया जाता है। मानवता जिन गुणों से समृद्ध होती है ।

उनमें क्षमा प्रमुख व महत्वपूर्ण है। कषाय के आवेग में व्यक्ति विचार शून्य हो जाता है। और हिताहित का विवेक

खोकर कुछ भी करने को तैयार हो जाता है।

लकड़ी में लगने वाली आग जैसे दूसरों को जलाती ही है। पर स्वयं लकड़ी को भी जलाती है। इसी तरह क्रोध

कषाय को समझ पर विजय पा लेना ही क्षमा धर्म है।

जैन समाज के सभी वरिष्ठ जनों ने इस अतुलनीय उदबोधन के लिए भारती जी का हार्दिक आभार व्यक्त किया।

इसके बाद ऑनलाइन आयोजन समिति के सदस्यों ने एक मनमोहक वीडियो एक्ट के द्वारा सभी साधर्मी बंधुओं

से समिति द्वारा जाने.अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगी।

जैनागम में वर्णित क्षमावाणी के सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए सभी साधर्मी बंधुओं ने उनके द्वारा विगत वर्ष

में जाने.अनजाने में मन, वचन, काय से हुई गलतियों के लिए एक दूसरे से क्षमायाचना की।

सकल जैन समाज ने आयोजन समिति के सदस्यों अनुभूति, वर्षा, संदीप, अमित, सुप्रीत और दीपक जैन का

तहे दिल से शुक्रिया अदा किया।

उनसे आग्रह किया कि आगे भी हर महीने ऐसे कार्यक्रम आयोजित करते रहें। नैवेद्यम ग्रुप द्वारा एक मजेदार

पारिवारिक प्रोग्राम खेल-खेल में ज्ञान बढ़ाए, का आयोजन किया गया।

इस खेल को व्हाट्सअप ग्रुप के माध्य्म से संचालित किया गया। इस पारिवारिक खेल में 25 परिवारों ने हिस्सा लिया।

इस अद्भुत एवं मनोरंजक प्रतियोगिता में सभी परिवारों ने एक टीम बनाकर अपनी.अपनी टीमों का नाम

विद्योदय, आद्या, गुरुकृपा, सिद्धशिला, दर्शनोदय, आजाद, आतम, सौधर्म, आदिनाथ, महावीरस्वामी,

प्रभावना, पार्श्वनाथ, विद्यासागर, चंद्रगिरी, वीर ग्रुप, कल्पवृक्ष, मोक्षित, आगम, शिखरजी, मधुबन, पारस ग्रुप नाम रखा।

इस कार्यक्रम को आयोजित करवाने में रागिनी, सुरभि, भुवी, सोनम, सपना, अवनी, शेफाली, पूनम, रितिका,

स्वाति, अनी, प्रिया एवं डॉ. श्रुति जैन का संपूर्ण योगदान था।

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