पद्म विभूषण तीजन बाई की पंडवानी को दूजनबाई पहुंचा रहे लोगों तक, जाने पूरी कहानी

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लोक कलाकार पंडवानी गायिका पद्श्री तीजन बाई को कौन नहीं जानता है। इन्होंने अपने कलाकारी से छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम देश में तो फैलाया ही है विदेशो तक भी पहुंचाया है। पंडवानी महाभारत की गाथा है जिसे लोक कलाकारों द्वारा विस्तार से बताया जाता है। तीजन बाई के बहुत से प्रशंसक है जो उनकी कलाकारी के मुरीद भी है।

उन्हीं में से एक ऐसे कलाकार है जो उनकी कला को अपने स्तर पर मंच के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे है। इनकी कलाकारी को लोग तो पसंद करते ही है। साथ ही खुद तीजनबाई इस कलाकार की कला से इतनी प्रभावित है।

तीजन बाई ने ही दिया है दूजनबाई नाम

दूजनबाई कोई महिला नहीं बल्कि एक पुरुष है। पूरा नाम है दिनेश गुप्ता है। ये बिलासपुर के लोक कलाकार है। पंडवानी की प्रस्तुति ये पूरी तरह से तीजन बाई की तरह ही देते है। 8 साल पहले राज्योत्सव में दिनेश गुप्ता ने पंडवानी की प्रस्तुति दी।

उस कार्यक्रम में पद्म विभूषण तीजनबाई ने दिनेश की प्रस्तुति को देखा। बहुत प्रभावित हुई और उन्होंने उसका नाम ही रख दिया दूजनबाई। तब से ही दूजन बाई के नाम से ही दिनेश प्रसिद्ध है।

क्या है पंडवानी

पंडवानी छत्तीसगढ़ की लोक कला है। इसमें महाभारत के पांडवों की कथा को बताया जाता है। पहले छत्तीसगढ़ के परधान तथा देवार जाति के लोग पंडवानी गाते थे। जिसे तीजन बाई ने अपनी कलाकारी से देश-विदेश में पहुंचाया।

बचपन से ही थे तीजन बाई के फैन

दिनेश बचपन से ही लोक कला को पसंद करते थे। लोक कलाकारों में पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजनबाई उन्हें बहुत ज्यादा पसंद थी। उनकी ही तरह दिनेश भी नाम कमाना चाहता था। इसी चाह में उसने मंच में तीजन बाई की तरह ही वेशभूषा धारण कर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया।

राज्योत्सव में उनकी प्रस्तुति से खुद तीजन बाई प्रसन्न हो गई। आगे बढ़ाएंगें पंडवानी के विरासत को तीजनबाई ने दूजनबाई नाम रखकर पंडवानी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए दिनेश को प्रोत्साहित किया। साथ ही इस तरह से अपनी कला का प्रदर्शन कर पंडवानी को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा दी। इस तरह से अब दूजन बाई के तौर पर पंडवानी की प्रस्तुति देते है।

छोटी तीजन बाई की दी थी उपाधि

पंडवानी कलाकार दूजनबाई यानी की दिनेश गुप्ता ने बताया कि विगत 8 साल पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में 80 लोक कलाकार शामिल हुए थे। 18 दिन तक चलने वाले कार्यक्रम में सुरूजबाई खांडे, पुनाराम निषाद व पद्मश्री तीजनबाई भी शामिल होने वाली थी। लेकिन किसी कारणवश तीनों दिग्गजों के शामिल न होने की बात सामने आई।

पंडवानी की प्रस्तुति के लिए रेखा जलक्ष़़त्री, रेखा देवार व दिनेश को चुना गया। कुछ दिनों बाद सुरूजबाई खांडे व पूनाराम निषाद के लौटने की वजह से रेखा जलक्षत्री, रेखा देवार को हटना पड़ा। तब दिनेश ने वहां पर पंडवानी की सुंदर प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। तब उन्हें छोटी तीजन बाई की उपाधि दी गई।

महिला बनकर देते है प्रस्तुति

दिनेश ने बताया कि जब वे कक्षा तीसरी में पढ़ रहे थें उसी समय तीजन बाई इंदिरा विहार में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने आई थी। उनकी प्रस्तुति को देखकर उनके जैसा बनकर पंडवानी गायन में अपना नाम कमाने की इच्छा हुई।

मैं हाथ में झाडू लेकर घंटों उनकी नकल करता था। थोड़ा बड़ा होने पर तीजन बाई जैसा रूप धारण कर जगह-जगह पंडवानी की प्रस्तुति देने लगा। इसके अलावा भजन, कीर्तन, जसगीत व अन्य कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगा।

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