ऑनलाइन विश्व सारंगी दिवस छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के द्वारा मनाया गया

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छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत द्वारा 27 जून को ज़ूम एप्प के द्वारा विश्व सारंगी दिवस का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की शुरुवात अमरावती के संगीत साधक श्री गिरीश नारायण जी के सिन्धी भजन प्रस्तुति के साथ की गई । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमरावती के संत श्री धीरज लाल जी थे । संत श्री धीरज लाल जी संत श्री भगत कंवर राम जी के प्रपौत्र हैं जो आज भी संत कवर राम जी के मानव सेवा व ईश्वर आराधना के कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं । संत श्री धीरज लाल जी ने पूरे समाज को सिंधी सारंगी दिवस की बहुत-बहुत बधाई दी और यह बताया कि सिंधी सारंगी दिवस का आयोजन एक जागृति का विषय है, जिससे समस्त विश्व में सारंगी के प्रति जागृति आएगी और लोग जानेंगे कि सारंगी सिंधियों का एक बहुत ही प्रचलित वाद्य यंत्र है । सारंगी का प्रयोग करके भगत कंवर राम अपनी भगत गाया करते थे और उनके इस आराधना में इतनी शक्ति थी कि वह मृत बालकों को भी लोली दे कर के जगा दिया करते थे ।

संत श्री धीरज लाल जी ने नई पीढ़ी को सारंगी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया और यह भी बताया कि सारंगी का नया इलेक्ट्रॉनिक वर्जन भी आ रहा है जो कि बहुत ही अच्छा और कर्णप्रिय है । संगीतकार एवं वक्ता श्री राजेश परसरामानी जी ने बताया कि सारंगी दिवस को मनाने के लिए 27 जून का दिन ही चुना गया क्योंकि सारंगी में 27 तार होते हैं उन्होंने समस्त लोगों को सारंगी दिवस की बधाई दी और यह बताया कि सिंधी सारंगी शीशम की लकड़ी की बनी हुई होती है और तीन उंगलियों से बजाई जाती हैं राजेश जी ने बताया कि सारंगी सिंधियों का वाद्य यंत्र है, पूरे विश्व में कई तरह की सारंगिया आती हैं जिसमें से एक जो राजस्थान की तरफ बहुत ही प्रचलित है वह सिन्धी सारंगी है ।

कार्यक्रम के दूसरे वक्ता तथा संगीतकार मुंबई के अशोक शहाणी जी जो फिल्म इंडस्ट्री में संगीत के क्षेत्र में कार्यरत हैं ने यह बताया कि सारंगी एक बहुत ही अच्छा वाद्य यंत्र है तथा अच्छी सारंगी बजाने वालों की हमेशा ही बहुत आवश्यकता होती है । शहाणी जी ने बताया कि उन्होंने कई संगीत कारो के साथ काम किया है तथा एक लंबा समय संगीत की सेवा में गुजारा है । अशोक शाहणी जी तुरही ( ट्रम्पेड ) वादक तथा मट ( ताल ) वादक हैं जिन्होंने की प्रचलित हिंदी गानों में मटके से ताल दी है ।
कार्यक्रम के संयोजक श्री चेतन तारवानी जी तथा कार्यक्रम की सलाहकार श्रीमती विनीता भावनानी जी रहीं । कार्यक्रम का संचालन चेतन तारवानी जी, अमर जी एवम विनीता भावनानी जी ने किया । कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवम पूज्य छत्तीसगढ़ पंचायत के अध्यक्ष श्री श्रीचंद सुंदरानी जी ने सभी को शुभकामनाएं दी एवम सिन्धी संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार दिवस के आयोजन की बधाई दी । कार्यक्रम के अंत मे कार्यक्रम के सार को बताते हुए श्री डी डी आहूजा जी ने बताया कि सिन्धी सारंगी बहुत ही अच्छा वाद्ययंत्र है जिसके साजिंदे बहुत कम है पर चाहने वाले बहुत है । उन्होंने बताया कि मास्टर चन्द्र (मशहूर सिन्धी गायक) के की गीतों पर नौशाद जी ने मास्टर चन्द्र की रजामंदी से हिंदी गाने बनाए है ।

सारँगी एक लुप्तप्राय वाद्य होता जा रहा था जो कि सिन्धी संगीत का आधार है । सारंगी को पुनर्जीवन देने हेतु कुछ समय पहले ही सिंधु घराना की स्थापना की गई है जिसके मुख्य संगीतकार राजेश परसरामनी जी हैं एवम मुख्य वाद्ययंत्र सारंगी है । सारँगी लुप्तप्राय वाद्य को पुनर्जीवन देने हेतु द्वितीय प्रयास के रूप में विश्व सारंगी दिवस का आयोजन किया गया एवम प्रति वर्ष इसके आयोजन का प्रण लिया गया । सिन्धी सारंगी को सीखाने के लिए राजेश परसरामानी ने सिलेबस भी तैयार किया है जिसका उपयोग वर्तमान में लाहौर संगीत विश्वविद्यालय में किया जा रहा है ।

कार्यक्रम के अंत मे राजेश मोटलानी जी ने भजेन प्रस्तुति दी तथा अनूप मसंद जी ने सभी कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु धन्यवाद दिया । कार्यक्रम में अशोक वासवानी, नंदलालजी पूरी, अमरलाल शादीजा, साक्षी खटवानी, प्राप्ति वशानि, राजकुमारी धींगानी, सुषमा जेठानी, भारतीय सिँधु सभा प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक नैनवानी जी, मुरली शादीजा जी, राधा राजपाल, डिम्पल शर्मा, त्रिलोक तारवानी समेत कई लोग उपस्थित थे

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