हताशा, निराशा, खालीपन से बचने अच्छी सोच रखना चाहिए-जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर-टिकरापारा स्थित जैन भवन में चल रहे अॅानलाइन चातुर्मास प्रवचन में जैन मुनि पंथक ने हताशा, निराशा और खालीपन से बचने ज्ञान दिया। उन्होंने कहा कि बाकी के सभी हीरो और मैं जीरो हूं यह एक ऐसी सोच है जिसे हमें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करना चाहिए। लेकिन ऐसे जीवन में एक चांस तो लेना ही चाहिए। अपनी जीवन शैली को सुधारने की एक्सरसाइज है।
दुनिया में सभी हीरों होते है और मैं जीरो हूं या केवल कल्पना करना है कि दूसरे जो भी कुछ जानते है या उनके पास जो समझदारी है, जो जानकारी है वह सभी तुम्हें यही सब कुछ सिखाने के लिए ही आए है। जैसे कि तुम्हारे वाहन चालक का छोटा लड़का भी कभी धैर्य या धीरज सिखने को सीखा जाता है। एक म्यूजिक सिंगर भी सीख जाता है कि ज्यादा दिमाग न लगाकर सिपर्फ अपने सिंगिंग में ही ध्यान देना चाहिए। अपने जीवन में कई ऐसे छोटे-बड़े ज्ञानी संपर्क में आते है पर किससे क्या-क्या सीखने की जरूरत है यह में निश्चित करना होता है।


मुनि ने आगे कहा कि जिंदगी जीने में यह फाॅर्मूला अपनाओं तो जीवन में कभी भी चिड़चिड़ापन, नफरत, हल्की सोच और अपने जीवन में कभी भी हताश नहीं होंगे। लोगों के अनुभव और इस प्रकार की सोच के लिए आप हमेशा तैयार रहोगे। किसी से हम क्या सीख सकते है या समझना है यदि ऐसा करेंगे तो जीवन में कभी भी हताशा, निराशा तथा खालीपन नहीं लगेगा। उदाहरण के लिए बैंक में जब किसी काम से लाइन में खड़े होकर उस क्लर्क को देखते हुए या विचार आता है कि वह कितना धीरे-धीरे काम कर रहा है उसे जल्दी काम करना चाहिए। लेकिन इससे विपरीत यदि हम सोचे कि वह क्लर्क हमें धीरज से खड़े होना सिखा रहा है। जल्दबाजी न करो ऐसा दिख रहा है तो मन शांत रहेगा। तो यह फाॅर्मूला जीवन में अपनाने से लोग क्या कर रहे है यह सीखने का अनुभव कराएगा। वह देखने की जरूरत है या समझने की जरूरत है तो अपना जीवन सदैव आनंदित रहेगा और खुशनुमा रहेगा।

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