गणेश चतुर्थी 22 को, भगवान के बाल स्वरूप पूजा करे ऐसे

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गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के बाल रूप का पूजन किया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। भाद्र पद षुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

इस बार यह पर्व 22 अगस्त को मनाया जाएगा। हिन्दू धर्म में श्रीगणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है। इसे प्रथम पूज्य गणेश भी कहते है। इस लेख के माध्यम से गणेश चतुर्थी के महत्व व पूजन विधि पर विस्तार से जानकारी देंगे।

गणेश चतुर्थी भाद्रपद माह के षुक्ल पक्ष की चतुर्थी की तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन देवी पार्वती ने भगवान गणेश को जन्म दिया था। यह जन्म संसार में होने वाली संतान की तरह नहीं बल्कि दैविय शक्ति के माध्यम से दिया गया। इस साल गणेश चतुर्थी 22 अगस्त दिन शनिवार को मनाई जाएगी। भगवान गणेश प्रथम पूज्य माने जाते है इसलिए देश भर में जोर-शोर से पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी का महत्व

इस दिन भगवान के बाल रूप की पूजा की जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। कहते है कि गणेश चतुर्थी पर जो भी व्यक्ति भगवान गणेश की सच्चे मन से आराधना करता है।

गणेश जी उस व्यक्ति के जीवन में आने वाले समस्त विघ्नों को दूर कर देते है। भगवान गणेश को शुभता, खुशहाली और मांगलिकता का सूचक माना जाता है। वह सभी लोगों का हित करने वाले है।

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि

पूजन के लिए भगवान गणेश की नई प्रतिमा लेकर आए। पंडितों से मंत्रोच्चारण के साथ गणेश जी की स्थापना करवाएं। स्थापना के बाद दस दिन तक रोज भगवान गणेश का पूजन, भजन और कीर्तन करे। नित्य सुबह स्नानादि कर भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं।

फूल हार चढ़ाए। गणेश जी की स्तुति और चालीसा का पाठ की उनकी आरती करे। याद रखे जिस प्रकार एक मनुष्य दिन में तीन बार भोजन करता है। उसी प्रकार से गणेश जी को भी भोग लगाए। उन्हें भोग अति प्रिय है। संध्या आरती करे। संभव हो तो कीर्तन भी करे।

मोदक अवश्य करे अर्पित

भगवान गणेश की पूजा में भोग अर्पित करते समय फल व अन्य मिष्ठान तो अर्पित करे ही। साथ ही साथ भगवान गणेश को मोदक अवश्य ही अर्पित करे। भगवान गणेश को सबसे अधिक मोदक ही प्रिय है। इसलिए मोदक भोग अवश्य ही अर्पित करे।

दुर्बा की माला पहनाएं

भगवान गणेश को तुलसी पत्र अर्पित न करे। इसके अलावा हर तरह के पुष्प व पत्र अर्पित किया जाता है। खास तौर पर भगवान को दुर्बा अति प्रिय है। दुर्बा की माला अर्पित करने मात्र से ही विघ्नहर्ता गणेश प्रसन्न हो जाते है। अपने भक्तों के समस्त दुखों को दूर कर देते है। इसलिए दुर्बा अवश्य ही अर्पित करे।

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