आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 20 को, भगवान विष्णु चार माह तक करते हैं विश्राम

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हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत अधिक महत्व होता है। हर माह में दो बार एकादशी पड़ती है। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। साल में कुल 24 एकादशी पड़ती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस समय आषाढ़ माह का शुक्ल पक्ष चल रहा है। 

20 जुलाई को है आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी

आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 20 जुलाई को है। इस एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

इस दिन से विष्णु भगवान करते हैं विश्राम

  • देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह तक विश्राम करते हैं। भगवान विष्णु कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तक विश्राम करते हैं। इस समय को चातुर्मास के नाम से भी जाना जाता है। 

देवशयनी एकादशी पूजा- विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • भगवान विष्णु का गंगा जल से अभिषेक करें।
  • भगवान विष्णु को पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें।
  • अगर संभव हो तो इस दिन व्रत भी रखें।
  • भगवान की आरती करें। 
  • भगवान को भोग लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर शामिल करें। ऐसा माना जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं। 
  • इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। 
  • इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें। 

देवशयनी एकादशी महत्व

  • इस पावन दिन व्रत रखने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। 
  • इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत रखने से मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • एकादशी की कथा

विष्णु पुराण के अनुसार भगवान हरि ने वामन रूप में दैत्य बलि के यज्ञ में तीन पग दान के रूप में मांगे थे। भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को नाप लिया। इसके बाद अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया।  प्रभु जैसे ही तीसरा पग बढ़ाने जा रहे थे कि दैत्य बलि ने उनके पैर पर अपना सिर रख दिया। इसे देख कर भगवान प्रसन्न होकर बलि को पाताल लोक का अधिपति बना दिया और तब उससे वर मांगने को कहा।

बलि ने कहा कि भगवान आपको मेरे महल में हमेशा रहना होगा। बलि के बंधन में बंधता देख देवी लक्ष्मी ने बलि को भाई बना लिया और बलि को वचन से मुक्त करने का अनुरोध किया। इसके बाद से ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश बारी-बारी से पाताल लोक में निवास करते हैं। तीनों देवता चार-चार महा यहां निवास करते हैं। भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवउठानी एकादशी तक, शिवजी महाशिवरात्रि तक और ब्रह्मा जी शिवरात्रि से देवशयनी एकादशी तक निवास करते हैं।

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