देवशयनी एकादशी 25 को, जाने पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

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हिन्दू धर्म में एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण होता है। साल भर में 24 एकादशी होती है। वहीं अगर मलमास हो तो इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। इन्हीं में से एक है देवउठनी एकादशी ।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहते है। माना जाता है कि आशाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयन को जाते है और फिर चातुर्मास के समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन देवउठनी उत्सव होता है।

इसी वजह से इसे देवउठनी एकादशी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक व्रत का महत्व व पूजन विधि को विस्तार से बताएंगे।

देवउठनी एकादशी पूजन का मुहूर्त

देवउठनी एकादशी 25 नवंबर बुधवार को पड़ रही है। एकादशी की तिथि 25 नवंबर को शुरू हो रही है। इसलिए रात्रि में तुलसी विवाह की विधि 25 को ही की जाएगी।

ऐसे करे देवउठनी एकादशी की पूजा

इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन विष्णु जी को जगाने का आह्वान किया जाता है। इस दिन सुबह उठकर साफ कपड़े पहने जाते है।

फिर विष्णु जी के व्रत का संकल्प लिया जाता है। फिर घर के आंगन में विष्णु जी के चरणों को ढक दिया जाता है। चरणों की आकृति बनाए। लेकिन धूप में चरण को ढके।

गमले में मां तुलसी का पौधा रखकर चारों तरफ चार गन्ने का मंडप तैयार किया जाता है। उसके बाद फूल मालाओं व चुनरी से तुलसी का श्रृंगार करे।

पूजन के दौरान 16 श्रृंगार की सामग्री भी अर्पित करे। इसके अलावा विवाह की विधि की तरह ही पूजन की सामग्री रखते हुए भगवान शालिग्राम के साथ तुलसी का विवाह करे।

हल्दी, कुमकुम से श्रृंगारित कर तुलसी के चारों ओर मौली धागा बांधे। फिर तुलसी मंत्र का जाप करे और तुलसी विवाह की कथा पढ़े।

फल व मिष्ठान को भोग के रूप में अर्पित करे। फिर आरती के बाद क्षमा प्रार्थना करते हुए आशीर्वाद ले। दूसरे दिन गन्ने को प्रसाद के तौर पर सभी को बांटे।

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