हर व्यक्ति हमारे विचारों से सहमत हो जरूरी नहीं- जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर- न होती हुई प्रशंसा या नफरत दोनों अपने लिए एक समान है, और अस्वीकार्य भी है । जीवन में हमने विचारों से जो एकमत नहीं है। उसके साथ भी हमें जीवन जीना पड़ता है, और यह भी सत्य है कि हम हर एक को हर समय खुश नहीं रख सकते हैं । कोई ना कोई तो हमसे नाखुश व विचारों में मतभेद रखने वाला होगा ही । उक्त बातें टिकरापारा स्थित जैन भवन में चातुर्मास ऑनलाइन व्याख्यान में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कही ।


उन्होंने आगे उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कि किसी चुनाव में एक पक्ष 70 बहुमत से जीता है । उसका मतलब 30 लोग आप से नाखुश है। परिवार, मित्रों व अपने कार्य क्षेत्र के सहकर्मियों को हम कितना पसंद वह स्वीकार है यह सर्वे करने से यह ज्ञात होता है कि और ताकि जाता है हमें कितना कितने पानी में है, जो अपने विचारों से सहमत नहीं होता है। उसके प्रति दुर्भावना होती है और गुस्सा भी आ जाता है। हम खुद भी निराश हो जाते हैं वह दूसरों से संबंधों में भी खटास आ जाती है

एक स्थापित सिद्धांत है उसको हर दिन दिमाग में रखना चाहिए, कि जो कोई भी अपने साथ काम करता है। वह जिसके साथ हम हमारा संपर्क रहता है वह हर एक कार्यों का विचारों में सहमत होगा, यह जरूरी नहीं है। इस सोच को हम लोग जीवन में आत्मसात करेंगे, तो अपनी जीवन सरलता के साथ व्यतीत होगी और आप प्रशंसा पत्र भी बनोगे और आपके अंदर से नकारात्मकता दूर हो जाइए।

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