चमत्कारी है मां पाताल भैरवी, 16 फीट नीचे है विराजित, जाने इतिहास

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प्रदेश के राजनांदगांव में देवी मां पाताल भैरवी के रूप में विराजमान है। माना जाता है कि पाताल भैरवी के रूप में मां भक्तों को दर्शन देते हुए कल्याण करती है। पूरा प्रदेश धार्मिक आस्था का केन्द्र है जहां पर शिव व शक्ति दोनों की भक्ति बहुत ही अच्छे से की जाती है। देवी मां पाताल भैरवी शक्ति का एक रूप है।

राजनांदगांव जिसे संस्कारधानी के तौर पर जाना जाता है। इस मंदिर को धार्मिक परंपराओं और संस्कृति को कायम रखने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। मां पाताल भैरवी 16 फिट नीचे वृत्ताकार गर्भग्रह में विराजित है। मां की प्रतिमा 15 फीट ऊंची और 11 टन वजनी रौद्र रूपी है। जो भक्तों को अचंभित करती है।

आकर्षण का केन्द्र है 108 फीट का शिवलिंग

इस मंदिर में शक्ति के अलावा शिव भी है। 108 फीट का शिवलिंग रूपी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। नवरात्रि में यहां आस्था का मेला लगता है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पूरे देश में मां पाताल भैरवी की प्रतिमा सहित शिवलिंग रूपी विशाल मंदिर और कहीं नहीं है।

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जड़ी-बूटी युक्त खीर बांटते है भक्तों को

यह मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केन्द्र नहीं है बल्कि आध्यात्मिक और सेवा केन्द्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। देशभर में इसकी ख्याती बढ़ रही है। शरद पूर्णिमा के दिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए भव्य मेला लगता है और यहां आने वाले भक्तों को जड़ी-बूंटी युक्त खीर का प्रसाद दिया जाता है।

इस प्रसाद को ग्रहण करने के लिए रतजगा करना पड़ता है। प्रसाद दवा के तौर पर खास मानी गई हें दमा, श्वास संबंधी कई बीमारियों से पीडित रोगियों को हिमालय से लाई गई जड़ी-बूटी से युक्त खीर का प्रसाद दिया जाता है।

पुराणों के आधार पर हुई है मंदिर की स्थापना

इस विशाल मंदिर का पूरा निर्माण पुराणों के आधार पर ही की गई है। जमीन के नीचे गर्भगृह में मां पाताल भैरवी विराजित है। पुराण के मुताबिक आगे-आगे बजरंग बली चले पीछे भैरव बाबा, बीच में देवी रहे के आधार पर हनुमानजी, मां काली, भैरव बाबा के साथ ही रजतयुक्त भगवान गणेश व अंबे की प्रतिमा स्थापित की गई है।

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सिद्धपीठ के द्वितीय तल में देवी लोक बनाया गया है। जहां अद्वितीय दशमहाविद्या स्थापित है। वृत्ताकार आकार में दशमहाविद्या मां तारा, मां कमला, मां ़ित्रपुर भैरवी, मां बग्लामुखी, मां मातंगी, मां राजराजेश्वरी, त्रिपुर सुंदरी, मां दुर्गा, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्न माता, मां षोडशी, धूमावती एवं मां काली के साथ ही तृतीय तल में द्वादश शिवलिंग व पारे के शिवलिंग व भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित है।

भक्तों के दुख दूर करती है मां पाताल भैरवी

पाताल भैरवी अपने भक्तों के कष्टों को दूर करती है। मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी भक्त एक बार मां पाताल भैरवी के दर्शन व पूजन करता है। मां उसके सभी दुखों का अंत कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।

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