अगहन गुरुवार के व्रत से मां लक्ष्मी होती है प्रसन्न, जाने व्रत की महिमा

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अगहन यानी की मार्गशीर्ष माह का बहुत महत्व होता है। जिस तरह से कार्तिक माह में कार्तिक स्नान व दीपदान करते हुए श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त करने श्रद्धालु आशीर्वाद मांगते है।

वैसे ही अगहन का महीना मां लक्ष्मी की आराधना के लिए खास होता है। इस माह में गुरुवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद पंडित मनोज तिवारी ने बताया कि गुरुवार का दिन मां लक्ष्मी को प्रिय है। इसलिए अगहन माह के गुरुवार माता की आराधना के लिए सबसे उत्तम माने गए है।

इस माह के प्रत्येक गुरुवार को मां लक्ष्मी की पूजा करने वाले भक्त को माता की विशेष कृपा मिलती है।

इस दौरान घर में माता की आंवले की मूर्ति स्थापित करते हुए सूर्योदय से भी पूर्व उठकर चार पहर की पूजा की जाती है। इस लेख के माध्यम से व्रत की महिमा बताएंगे।

चार पहर की पूजा का है विधान

अगहन माह के गुरुवार को मां लक्ष्मी की पूजा खास तौर पर की जाती है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व ही उठकर घर की महिलाएं विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना करती है।

सुबह सूर्योदय से पूर्व, फिर दोपहर, शाम व रात इस तरह से चार पहर की पूजा की जाती है। इस पूजा में बुधवार की रात्रि से ही मां लक्ष्मी व भगवान नारायण के आंवले व आम से बने प्रतिमा स्थापित कर रात्रि में ही कलश

प्रज्ज्वलित कर पूजा की जाती है। इसके बाद गुरुवार की सुबह विधि-विधान से पूजा कर उत्सव की तरह पूरे दिन मां लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है।

दीप जलाकर करते है आहवान

मां लक्ष्मी की पूजा बुधवार की रात्रि में कलश प्रज्ज्वलित कर प्रारंभ होती है। उसके बाद सुबह मां लक्ष्मी का आहवान घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर किया जाता है।

रात्रि में भी मां लक्ष्मी की आराधना के बाद घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाए जाते है।

चावल के घोल से तैयार करते है अल्पना

चावल के घोल से घर में मां लक्ष्मी के प्रतीक चिन्ह बनाते है। जिसमें लक्ष्मी मां के पग चिन्ह, स्वास्तिक, ओम जैसे प्रतीक चिन्ह बना कर उसकी ही पूजा करते है। घर के आंगन से लेकर पूजा कक्ष तक रेहन से प्रतीक चिन्ह बनाते है।

नए चावल का लगाते है भोग

इस पूजन में मां लक्ष्मी को नए चावल से बने प्रसाद का भोग लगाकर अर्पित करते है। इस माह में जीतने भी गुरुवार को खीर, फरा, चीला, चैसेला जैसे पारंपरिक पकवान बनाते है। जिसे पूरे परिवार के लोग ग्रहण करते है।

झाडू-पोंछा करना होता है वर्जित

इस व्रत में गुरुवार को पोंछा-झाडू करना वर्जित होता है। इसी वजह से एक दिन पहले ही घर की सफाई कर ली जाती है। साथ ही साथ इस दिन धन खर्च करना भी वर्जित माना जाता है। धन मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए इस दिन इन सब नियमों का पालन करना होता है।

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