मां कलावती ने किया, समाजसेविका रेखा का सम्मान

जो खुद एक मां है, एक बेटी है, एक पत्नी है, एक बहन है जिसने कभी किसी बात पर घमंड नहीं किया। एक ही मंत्र लेकर चली सेवा ही परम धर्म है। भारतीय सिंधु सभा व पूज्य सिंधी सेंट्रल महिला विंग की कोषाध्यक्ष सेवा एक नई पहल की संयोजक सदस्य, अपना घर की प्रदेश अध्यक्ष रेखा आहूजा आज किसी नाम के मोहताज नहीं है। कोई उसे दीदी बुलाता है और कोई उसे बहन बुलाता है कुछ उसे फरिश्ता भी कहते है तो कोई उसे दीदी कहता है कोइ उसे मां के रूप में देखता है।

जिसकी जैसी भावना वैसा ही नाम दिया। पर वह अपने आप को एक मामूली इंसान मानती है। जिसके खून में सेवा भरी हुई है। जिसने सेवा को ही परमो धर्म माना। न जाने कितनों को अपना माना और निःस्वार्थ भाव से सेवा की और आज भी कर रही है। पूरे करोना काल में सब घर के अंदर छुपे रहे। कोई निकला नहीं उस समय यह अकेली महिला घर के बाहर निकली और लोगों की मदद के लिए गली-गली, मोहल्ला-मोहल्ला घूमती रही।

जिधर से मदद की पुकार आई। जिससे हेल्प की फोन आई दौड़ी चली सेवा करने न खाने की चिंता न सोने की चिंता न करोना से डर। बस चल पड़ी सेवा करने, लोगों की हेल्प करने। ऐसी समाज सेविका महिला रेखा आहूजा का मां कलावती दुसेजा ने अपने निवास स्थान पर शाल पहनाकर सम्मान किया। मां ने कहा महिलाएं बहुत है, ऐसी महिलाएं बहुत कम देखी हैं। जो इस करोना काल में भी अपनी जान की परवाह किए बगैर भूखी-प्यासी रहकर भी जो निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा कर रही है।

दिन रात ऐसी महिला का समान करके आज मुझे डबल खुशी हो रही है और आशीर्वाद दिया कहा कि सदा यूं ही मुस्कुराती रहो। लोगों के दिलों पर राज करती रहो ईश्वर लंबी करे, तुम्हारी उम्र सदा लोगों का कल्याण करती रहो और मदद करती रहो। कभी झोली हो ना तुम्हारी खाली, कोई दर पर आकर खाली ना जाए सवाली। ईश्वर सदा तुम्हारे घर बाहर अन्न, धन-दौलत से अटूट भरे और सदा बरकत हो यही आशीर्वाद है मां का तुम्हारे लिए रेखा दीदी भाव-विभोर हो गई। मां का आशीर्वाद लिया और कहा ऐसा लगा कि मुझे भगवान का भी आशीर्वाद मिल गया है । वाकई में मां ये तो मैंने बहुत देखी हैं लेकिन ममतामई मां आज पहली बार देख रही हूं, जैसा सुना था उस से बढ़कर आज देख रही हूं और पा लिया। मैं धन्य हुई ऐसी मां से मिलकर मां का आशीर्वाद पाकर।

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