माता को खाने आया शेर बन गया उनका वाहन, जाने कैसे

1

हिन्दू धर्म के सभी देवी-देवताओं का कोई न कोई वाहन है। वाहन बनाने का अर्थ उसमें सवारी करना ही नहीं था बल्कि देवी.देवताओं ने जितने भी पशु.पक्षियों को वाहन बनाकर उनकी रक्षा का कार्य किया है।

देवी-देवताओं ने मनुष्यों से पशु.पक्षियों के रक्षण से वाहन बनाकर संरक्षण दिया है। हर देवी-देवता के अलग-अलग वाहन देखने को मिलता है। सिंह से लेकर हाथी, मूशक हर तरह के पशु-पक्षियों को वाहन बनाया है।

इन सब पशुओं में सिंह या बाघ को सबसे खतरनाक माना गया है। यह खतरनाक बाघ किसी और का नहीं बल्कि शिव की प्रिया मां पार्वती का वाहन है। सिंह के मां पार्वती का वाहन बनने के पीछे रोचक पौराणिक कथा है जिसे हम इस लेख के माध्यम से बताएंगे।

ऐसे बना बाघ मां पार्वती का वाहन

एक कथा के अनुसार शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने हजारों वर्ष तक तपस्या की। तपस्या से देवी सांवली हो गई। भगवान शिव से विवाह के बाद एक दिन जब शिव पार्वती के साथ बैठे थे तब भगवान शिव ने पार्वती से मजाक करते हुए उन्हें काली कह दिया।

देवी पार्वती को शिव की यह बात चुभ गई और कैलाश छोड़कर वापस तपस्या करने में लीन हो गई। इसी बीच एक भूखा शेर देवी को खाने की इच्छा से वहां पहुंचा। लेकिन तपस्या में लीन देवी को देखकर वह चुपचाप बैठ गया।

शेर सोचने लगा कि देवी कब तपस्या से उठे और वह उन्हें अपना आहार बना ले। इस बीच कई साल बीत गए लेकिन शेर अपनी जगह डटा रहा। इस बीच देवी पार्वती की तपस्या पूरी होने भगवान शिव प्रकट हुए और पार्वती को गौरवर्ण यानी गोरी होने का वरदान दिया।

जब माता पार्वती को पता चला कि यह बाघ उनके साथ ही तपस्या में यहां सालों से बैठा रहा है तो माता ने प्रसन्न होकर उसे वरदान स्वरूप अपना वाहन बना लिया। तब से मां पार्वती का वाहन बाघ हो गया।

इसका कारण यह था कि बाघ ने देवी को खाने की प्रतिक्षा में उन पर नजर टिकाए रखकर वर्षों तक उनका ध्यायन किया था। देवी ने इसे बाघ की तपस्या मान लिया और अपनी सेवा में ले लिया। इसलिए देवी पार्वती के बाघ और वृष दोनों वाहन माने जाते है।

इसलिए कहते है मां पार्वती को गौरी

भगवान शिव ने तपस्या के बाद माता पार्वती को गौरवर्ण होने का आशीर्वाद दिया। यानि की गोरी होने का वरदान दिया। तब मां पार्वती गंगा स्नान कर आई और उनके शरीर से सांवली देवी प्रकट हुई जो कौशिकी कहलायी और गौरवर्ण हो जाने के कारण देवी पार्वती गौरी कहलाने लगी।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here