पारिजात के पुष्प का महत्व जानते है मोदी भी, तभी तो लगाया राम के आंगन में, जाने खूबी इस पुष्प के

1

पारिजात के पुष्प के विषय में अक्सर ही पुराणों में उल्लेख मिलता है। साथ ही इसके महत्व को भी बार-बार बताया जाता है। इस वर्ष 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हनुमानगढ़ी में पूजा के बाद श्रीराम के आंगन में भूमि पूजन के बाद इस पुष्प के पौधे रोपे है। वे भी इस पुष्प के महत्व को जानते है। जिसके कारण इस पुष्प को रोपने का कार्य किया है। आखिर इस पुष्प की खास बात क्या है हम इस लेख के माध्यम से बताएंगे।

कहां से प्राप्त हुआ है यह पुष्प
पारिजात एक ऐसा पेड़ है जिसके बारे में पुराणों में उल्लेख मिलता है िकवह सागर मंथन से प्राप्त हुआ दिव्य वृक्ष है। जिसे स्वर्ग से धरती पर लाया गया। इस वृक्ष के साथ भगवान राम और देवी सीता के वनवास के दिनों की यादें भी जुड़ी हुई है। माता सीता वनवास के दिनों में इस वृक्ष के फूलों को चुनकर माला गंूथती थी और श्रृंगार किया करती थी। इसलिए इस फूल को श्रृंगार हार और हर सिंगार के नाम से भी जाना जाता है। कहते है इसके फूलों से माता लक्ष्मी और उनके अवतारों सीता और रूकमणी की पूजा की जाए तो घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

कई नामों से जाना जाता है यह पुष्प
पारिजात का रहस्य इतना ही नहीं है। पारिजात का हिन्दू धर्म में विशेष और पवित्र स्थान है। इसे अनेक नामों से भी जाना जाता है। श्रृंगार हार, हरसिंगार, शिउली और शेफाली के नाम से भी पुकारा जाता है। पारिजात का वानस्पतिक नाम निक्टेन्थिस आर्बोट्रिस्टिस है। वहीं अंग्रेजी में इसे नाइट जैसमीन कहते है। स्वर्ग की अप्सरा को भी इससे बड़ा लगाव था। वह इस पेड़ के साथ थकान मिटाने आया करती थी। इसे आयुर्वेदिक व दिव्य पुष्प माना गया है।

कई नामों से जाना जाता है यह पुष्प
पारिजात का रहस्य इतना ही नहीं है। पारिजात का हिन्दू धर्म में विशेष और पवित्र स्थान है। इसे अनेक नामों से भी जाना जाता है। श्रृंगार हार, हरसिंगार, शिउली और शेफाली के नाम से भी पुकारा जाता है। पारिजात का वानस्पतिक नाम निक्टेन्थिस आर्बोट्रिस्टिस है। वहीं अंग्रेजी में इसे नाइट जैसमीन कहते है। स्वर्ग की अप्सरा को भी इससे बड़ा लगाव था। वह इस पेड़ के साथ थकान मिटाने आया करती थी। इसे आयुर्वेदिक व दिव्य पुष्प माना गया है।

पारिजात को दिया इंद्र ने श्राप
पत्नी की जिद पूरी करने के लिए श्रीकृष्ण को देवलोक पर आक्रमण करना पड़ा। इंद्र नहीं चाहते थे कि स्वर्ग की संपदा धरती पर जाए। लेकिन श्रीकृष्ण सामने थे तो मना भी नहीं कर सकते थे। श्रीकृष्ण जब इसे धरती पर लेकर आने लगे तो इंद्र से रहा नहीं गया और उन्होंने शाप दे दिया कि पारिजात के फूल बस रात में खिलेंगे और सुबह बिखर जाएंगे। इसलिए पारिजात के फूल सूर्योदय से पहले ही गिर जाते है।

धरती पर गिरे पुष्प से करते है पूजा
वैसे तो माना जाता है कि धरती पर गिरे हुए पुष्प को पूजन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लेकिन पारिजात के फूलों को लेकर ऐसा नहीं है। पारिजात के बिखरे फूलों को चुनकर ही देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। स्वर्ग से पारिजात को लाने के बाद कान्हा ने चतुराई से इस वृक्ष को ऐसे लगाया कि पेड़ तो सत्यभामा के आंगन में रहा लेकिन फूल सारे रूकमणी के आंगन में ही गिरते थे। इन्हे चुनकर ही देवी अपना श्रृंगार किया करती थी। इसलिए इसके फूलों को चुनकर ही पूजा में प्रयोग का विधान है।

पौराणिक कथा है पारिजात की
पारिजात के वृक्ष को लेकर एक कथा ऐसी भी है कि यह एक राजकुमारी थी जिसे सूर्य से प्रेम हो गया था। लेकिन सूर्य ने इन्हें अपनाने से मना कर दिया। प्रेम में पारिजात ने शरीर का त्याग कर दिया और इसकी चिता से एक पौधा निकला जिसके फूल रात में खिलकर अपनी सुगंध से मन को मोह लेते है। लेकिन सुबह सूर्य के निकलने से पहले ही बिखर जाते है। कहते है कि वह राजकुमारी ही पारिजात के वृक्ष के रूप में प्रकट हुई थी जैसे वृंदा की चिता की राख से तुलसी की उत्पत्ति हुई थी।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here