पौराणिक कथाओं में मिलता है आधुनिक विज्ञान का उल्लेख, जाने कैसे

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आधुनिक युग को विज्ञान व तकनीक का युग कहा जाता है। आज हर एक चीज विज्ञान पर ही आधारित है। लेकिन इसका उल्लेख प्राचीन काल में भी मिलता है।

कैसे मिलता है इस बात को बताने के उद्देश्य से यह लेख है। जिसमें हम राजा मुचुकंद की कथा के माध्यम से बताएंगे।

यह सिर्फ कथा नहीं है बल्कि इसका उल्लेख विष्णु पुराण में मिलता है। राजा मुचुकंद की इस कथा में समय विस्तारण का उल्लेख है।

राजा मुचुकंद की कथा

यह कहानी राजा मुचुकंद की है। विष्णु पुराण में श्री कृष्ण लीला में इनकी कथा का उल्लेख मिलता है। राजा मुचुकंद इच्छावाकु वंश के राजा थे।

जिनकी वीरता की चर्चा स्वर्ग में भी होती थी। एक बार असुरों ने देवलोक पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को पराजित करने लगे तो देवराज इंद्र ने इनसे सहायता मांगी।

राजा मुचुकंद ने अपने बल और पराक्रम से असुरों को पराजित कर दिया। देवराज इंद्र ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा।

तब राजा ने अपने परिवार के पास जाने की इच्छा जाहिर की। तब देवराज इंद्र ने कहा कि आप कुछ और मांगे। तब भी राजा ने परिवार से ही मिलने की बात कही।

इंद्र ने कहा कि स्वर्ग में एक वर्ष हो रहा है लेकिन यह समय पृथ्वी पर एक युग के बराबर है। आपका परिवार और आपकी प्रजा सभी काल के ग्रास में चले गए है।

आप उनसे नहीं मिल सकते। यह सब सुनकर राजा दुखी हुए और कहा कि अब मैं सोना चाहता हूं इसलिए हे देवराज मुझ वरदान दीजिए कि मैं गहरी नींद में सो सकूं और मुझे कोई नींद से न जगाए।

देवराज ने राजा से कहा कि आप कहीं गुप्त स्थान पर जाकर सो जाइए। जो भी आपको नींद से जगाएगा आपकी दृष्टि से वह जलकर भस्म हो जाएगा।

राजा मुचुकंद त्रेतायुग से सोते.सोते द्वापर युग में आ गए और उन्हें इसका पता ही नहीं चला।

जब यूनान के राजा कालयवन ने मथुरा पर आक्रमण कि तब श्री कृष्ण कालयवन को बहलाकर उस गुफा में ले गए। जहां राजा मुचुकंद सो रहे थे।

कालयवन ने राजा को कृष्ण समझकर गलती से राजा को जगा दिया और भस्म हो गए।

क्या है समय का फैलाव जाने

टाइम डायलेशन को समय का फैलाव कहा जाता है। जिसमें डायलेशन का मतलब कुछ भी जो आकार बदलता है। आमतौर पर बढ़ रहा है।

समय फैलाव समय का विरूपण या समय का विस्तार है। सन १९०५ में आइंस्टीन ने सापेक्षता का सिद्धांत दिया और उसने बताया कि समय नियत दर से चलने वाली राशि नहीं है समय हर किसी के

लिए एक ही दर पर नहीं बितता है। यह बात स्वर्ग व धरती दोनों के लिए अलग थी। जो राजा मुचुकंद के कहानी में मिलती है।

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