बड़े-बुजुर्गां की जरूरतें पूरी कर उन्हें उनका अधिकार दें-ब्रह्माकुमारी गायत्री

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बिलासपुर टिकरापारा . अपने अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में हम बचपन से पढ़ते आए हैं लेकिन उन्हें जीवन में अमल में लाने के लिए हमें आध्यात्म को अपनाने की आवश्यकता है।

आध्यात्म हमें संतुलित जीवन जीना सिखाता है। कहां हमें त्याग करना है और कहां पर अधिकार लेना है। आज हमारे बड़े-बुजुर्ग बहुत त्याग व मेहनत करके हमें सब कुछ प्रदान करते हैं,

हमारी सुख.सुविधाओं को पूरा करते हैं। लेकिन जब उन्हें उनके अधिकार मिलने का वक्त आता है तब उनके पास इतनी शक्ति नहीं होती कि वे अपना अधिकार ले सकें।

उस स्थिति में उनकी जरूरतें पूरी करना हमारा कर्तव्य है और यही उनका अधिकार भी है। उक्त विचार विश्व मानव अधिकार दिवस के अवसर पर टिकरापारा सेवाकेन्द्र की बहन ब्रह्माकुमारी गायत्री ने दिए।

उन्होंने कहा कि मनुष्य दोषारोपण में पीछे नहीं हटता। जब केदारनाथ में प्रलयंकारी बाढ़ तूफान आया था तब कहा गया कि गंगा बनी विध्वंसिनी लेकिन वास्तव में गंगा विध्वंसिनी नहीं है

बाद में पता चला कि उसका सही कारण तो मनुष्यों द्वारा प्रकृति का दोहन करना है। आज हमें अपना अधिकार लेने के लिए मेहनत लगती है।

लेकिन आज अशांत, दुखी, पीड़ित आत्माओं को सुख, शान्ति, आनन्द, प्रेम,पवित्रता, ज्ञान और शक्ति का अधिकार देने के लिए स्वयं भगवान इस

भारत भू पर अवतरित हुए हैं और इन सातों गुणों और शक्तियों को लुटा रहे हैं। राजयोग सीखकर हम भी उन अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं।

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