भगवान जगन्नाथ से महालक्ष्मी हुई क्रोधित, रथ को दूतों से तोडऩे कहा, जाने क्यो

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भगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा उत्सव के विषय में तो सभी जानते है। लेकिन इस दौरान होने वाली प्रभु की छोटी-छोटी लीलाओं से लोग परिचित नहीं है। इस लेख के माध्यम से हम उन लीलाओं को बताने का प्रयास कर रहे है। ताकि महाप्रभु जगन्नाथ के मनुष्य की तरह दिनचर्या होने का वास्तविक ज्ञान लोगों को हो सके।
देश भर में जहां भी रथयात्रा उत्सव मनाया जाता है। वहां पर प्रभु जगन्नाथ की प्रत्येक लीला को दर्शाया जाता है। उन्हीं लीलाओं में से एक लीला है हेरा पंचमी की। आखिर हेरा पंचमी क्या है और महाप्रभु पर महालक्ष्मी कैसे और क्यों क्रोधित हुई आइए जानते है।


० निकले है भाई-बहन के साथ यात्रा पर
रथ यात्रा उत्सव में महाप्रभु जगन्नाथ बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र के साथ निकल गए। भव्य रथ में सवार होकर मौसी गुंडिचा के घर पहुंच गए। जहां पर उनका खूब स्वागत सत्कार होता है। महाप्रभु मौसी के घर मेहमान बनकर पहुंच गए। वहां पर सात दिन विश्राम कर आनंदित हो रहे है।
० महालक्ष्मी है श्री मंदिर में
महाप्रभु जगन्नाथ की पत्नी महालक्ष्मी श्री मंदिर में ही अकेली है। महालक्ष्मी भी उनके साथ भ्रमण के लिए जाना चाहती थी। लेकिन उन्हें नहीं लेकर जाते है। जिससे वे मंदिर में ही है और वहां पर उन्हें प्रभु के बिना अच्छा नहीं लग रहा है।


० क्रोधित होती है महालक्ष्मी
वे महाप्रभु से मिलने के लिए मौसी के घर गई। उन्हें जल्दी से अपने साथ श्री मंदिर चलने का आग्रह करती है। लेकिन प्रभु मौसी के घर रूक जाते है। जिससे क्रोधित होकर महालक्ष्मी वापस लौट जाती है। फिर अपने खास दूत नंदीघोष से महाप्रभु के रथ को क्षति पहुंचाने कहती है ताकि वे अब श्री मंदिर न आ सके।
० हेरा पंचमी क्या है
रथ यात्रा उत्सव के तीसरे दिन हेरा पंचमी की रस्म अदा की जाती है। यह रस्म मौसी मां गुंडिचा के घर में होता है। जहां पर महालक्ष्मी चुपके से भगवान से मिलने आती है और उनके वापस न आने की बात सुनकर क्रोधित होकर वापस जाती है। इस तरह से महालक्ष्मी के दूत रथ को तोडऩे का प्रयास करते है। इस विधि को रोचक तरीके से करते हुए प्रभु की लीला को दर्शाया जाता है।

5 COMMENTS

  1. ईस लेख से भगवान की लीला कैसी है यह जानकारी मीली बहुत अच्छा लगा
    🙏जय महालक्ष्मी🙏

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