पार्थिव शिवलिंग निर्माण करने से मुराद पूरी करते है महादेव, कैसे पढ़े इस लेख में

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हिन्दू धर्म में प्रत्येक देवी-देवताओं की पूजा के लिए तिथि तय है और उसी तिथि के मुताबिक पूजन किया जाता है। हिन्दी महीनों के मुताबिक 12 माह में बहुत से व्रत व त्योहार आते है। इस 12 माह में अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए दिन, तिथि व माह तय है। उसी के मुताबिक सावन का महीना महादेव की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस माह भर सोमवार का व्रत कर महादेव की पूजा श्रद्धालु करते है। वहीं शिवपुराण की कथा, रुद्राभिषेक व महामृत्युंजय मंत्रों का जाप जैसे पूजन किए जाते है। वहीं इस दौरान महादेव का पार्थिव शिव लिंग निर्माण कर पूजन भी किया जाता है।

इस लेख के माध्यम से हम पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन के महत्व पर प्रकाश डालेंगे।
सावन का महीना महादेव को पूरी तरह से समर्पित माना गया है। इस वजह से सावन के महीने में महादेव की पूजा साधक अपने-अपने तरीके से करते है। इस दौरान पार्थिव शिव लिंग निर्माण कर षोडषोपचार विधि से महादेव का अभिषेक व श्रृंगार कर आरती की जाती है। माना जाता है कि महादेव की पूजा पार्थिव शिवलिंग बनाकर करने से भक्त के समस्त मनोरथ को महादेव पूर्ण करते है।

शिव पुराण में है पार्थिव शिवलिंग निर्माण का महत्व

शिव पुराण में पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व बताया गया है। कहते है जो कोई भी सच्चे मन से इनका पूजन करता है उसकी सारी मनोकामना भगवान पूरी करते है। कलयुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने पार्थिव पूजन प्रारंभ किया था। शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से धन-धान्य, आरोग्य और पुत्र प्राप्ति होती है। वहीं मानसिक और शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति मिल जाती है।

हर कोई कर सकता है इस पूजन को

ऐसा माना जाता है कि पार्थिव पूजन को महिलाएं-पुरुष हर कोई कर सकता है। मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग निर्माण पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। शिवजी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन में हर कोई शामिल हो सकता है। यह सब के लिए कल्याणकारी व मंगलकारी माना गया है।

ऐसे करे पार्थिव शिवलिंग पूजन

पूजन करने से पहले पार्थिव शिवलिंग निर्माण करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाए। शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से उंचा नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे अधिक उंचा होने पर पूजन का पुण्य प्राप्त नहीं होता है। इसके बाद शिव मंत्र बोलते हुए उस मिट्टी से शिवलिंग बनाने की क्रिया शुरू करे। पूर्व या उत्त दिशा की ओर मुंह रखकर शिवलिंग बनाना चाहिए। मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाना चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि जो प्रसाद शिवलिंग से स्पर्श कर जाए उसे ग्रहण नहीं करे।

इन देवों की पहले करे पूजा

शिवलिंग बनाने के बाद गणेश जी, विष्णु भगवान, नवग्रह और माता पार्वती का आह्वान करना चाहिए। फिर विधिवत तरीके से षोडशोपचार करना चाहिए। पार्थिव बनाने के बाद उसेपरम ब्रम्ह मानकर पूजा और ध्यान करे। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता हे। इस पूजा को सपरिवार करना चाहिए।

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