महादेव के भक्तों में भगवान विष्णु भी है शामिल जाने, नेत्र अर्पित करने की कथा

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देव आदि देव महादेव की पूजा मनुष्य, देवता और दानव सभी करते है। महादेव जैसे भोले भंडारी को हर कोई पूजता है। महादेव की कृपा भक्तों को मिल जाए तो समझ लो सभी देवी-देवता की कृपा मिल गई। वैसे तो महादेव के भक्तों को हम जानते ही है।

लेकिन उन भक्तों में एक भक्त स्वयं श्री हरि विष्णु जी है। श्री हरि विष्णु महादेव के परम भक्त है और उन्होंने अपनी भक्ति का उदाहरण अपने नेत्रों को अर्पित करके दे दिया था। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक शिव व विष्णु एक दूसरे के पर्याय है। शिव का नाम लो तो विष्णु प्रसन्न होते है और विष्णु का नाम लो तो शिव प्रसन्न हो जाते है। इस लेख के माध्यम से हम महाशिवरात्रि का महत्व व विष्णु भगवान के शिव भक्ति की कथा को बताएंगे।

महाशिवरात्रि में महादेव की इस कथा को पढ़े

शिव जी को विष्णु ने अर्पित किए थे अपने नेत्र

प्रचलित कथा के मुताबिक एक बार भगवान विष्णु देव आदि देव महादेव का पूजन करने के लिए काशी पधारे। वहां मणिकर्णिका घाट पर स्नान करके उन्होंने एक हजार स्वर्ण कमल पुष्पों से भगवान विश्वनाथ की पूजा का संकल्प किया।

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अभिषेक के बाद जब वे पूजन करने लगे तो शिवजी ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के उद्देश्य से एक कमल के पुष्प कम कर दिया। एक पुष्प की कमी देखकर भगवान विष्णु ने सोचा कि मेरी आंखें कमल के समान ही है। इसलिए तो मुझे कमलनयन और पुण्डरीकाक्ष कहा जाता है।

एक कमल के स्थान पर मैं शिवजी को अपनी एक आंख ही चढ़ा देता हूं। ऐसा सोचकर वे अपने कमल सदृश आंख चढ़ाने को तैयार हो गए। भगवान विष्णु की इस अगाध भक्ति से भावुक होकर महादेव प्रकट होकर बोले हे श्रीहरि विष्णु तुम्हारे समान इस संसार में मेरा कोई दूसरा भक्त नहीं है।

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