सोम प्रदोष के योग में होगी भगवान शिव की आराधना, जाने इस माह के प्रदोष व्रत के विषय में

इस माह 24 मई को प्रदोष का व्रत किया जाएगा। इस बार यह व्रत सोम प्रदोष के योग में मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक सोमवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने पर इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। शिव जी की पूजा का पर्व प्रदोष है और सोमवार का दिन महादेव को प्रिय है। इस वजह से इस बार का यह प्रदोष व्रत महत्वपूर्ण होगा। सोम प्रदोष के योग में महादेव की पूजा करने वालों को सुख-समृद्धि के साथ ही कई गुणा अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी।

प्रदोष काल में करे महादेव की पूजा
प्रदोष व्रत का मतलब ही है महादेव की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में करना। इस बार 24 मई को यह व्रत सोमवार को पड़ने से इसका महत्व बढ़ गया है। प्रदोष व्रत के दिन सुबह से ही पूजन की तैयारी करना चाहिए। विधि-विधान से महादेव व माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। इस बार प्रदोष की तिथि 24 मई को सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर शुरू होगी। जो 25 मई को सुबह 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। इसलिए 24 मई की शाम को ही प्रदोष काल में पूजा कर ले।

प्रदोष व्रत की है पौराणिक कथा
प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। चंद्र देव को क्षय रोग हो गया था। जिसके चलते उन्हें मृत्युतुल्य कष्ट हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुनः जीवन प्रदान किया था। अतः इस वजह से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा। प्रदोष व्रत के पीछे कई कथाएं है। उनमें से एक यह कथा है। स्कंद पुराण में भी प्रदोष व्रत का वर्णन मिलता है। इस व्रत को करने से सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है।

इसमें एक विधवा ब्राम्हणी और शांडिल्य ऋषि की कथा के माध्यम से इस व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है। पद्म पुराण की एक कथा के मुताबिक चंद्रदेव जब अपनी 27 पत्नियों में से सिर्फ रोहिणी से ही सबसे ज्यादा प्यार करते थे और बाकि 26 को उपेक्षित रखते थे जिसके चलते उन्हें श्राप दे दिया गया था। श्राप के कारण ही उन्हें कुष्ट रोग हो गया था। ऐसे में अन्य देवताओं की सलाह पर उन्होंने शिवजी की आराधना की और अपनी रोग से मुक्ति प्राप्त की।

प्रदोष व्रत में क्या करे और क्या नहीं
-प्रदोष काल में उपवास में सिर्फ हरे मूंग का सेवन करना चाहिए, क्योकि हरा मूंग पृथ्वी तत्व है और मंदाग्नि को शांत रखता है।

-प्रदोष व्रत में लाल मिर्च, अन्न, चावल और सादा नमक नहीं खाना चाहिए। इसे पूर्व उपवास या फलाहारी भी कर सकते है।

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