भगवान परशुराम के गुरु थे स्वयं महादेव, जाने क्या मांगा था गुरु दक्षिणा में

भगवान परशुराम भारत के ऐसे ऋषि मुनि हुए जिन्होंने समय-समय पर धरती पर दुष्टों, अधर्मियों और अहंकारियों का नाश किया। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने पुराणों में उल्लेखित जानकारी के मुताबिक बताया कि भगवान परशुराम ने दुष्ट हैहयवंशी क्षत्रियों का 21 बार पृथ्वी से संहार किया। भगवान परशुराम एक ब्राम्हण थे और उनकी शस्त्र विद्या का जवाब नहीं था। भगवान परशुराम के गुरु कोई और नहीं बल्कि स्वयं महादेव थे।

जीवन भर सीखते रहे भगवान परशुराम

विष्णु के अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम ने जीवन भर सीखते रहे। पहले अपने पिता ऋषि जमदाग्नि से शिक्षा प्राप्त किया। उसके बाद शस्त्र विद्या देवों के देव महादेव से प्राप्त किया। वास्तविक गुरु भगवान महादेव थे। महादेव का शिष्य होकर विश्व से बुराई का अंत करने युद्ध करते रहे और सदैव ही आगे बढ़ते रहे।

आखिर क्यों नहीं दे पाए गुरु दक्षिणा

पुराणों के मुताबिक एक कहानी प्रचलित है कि एक बार परशुराम ने शिव जी से शिक्षा लेने के बाद गुरु शिव को गुरु दक्षिणा देने का विचार किया। शिवजी ने कहा कि मुझे गुरु दक्षिणा में शेष नाग का सिर चाहिए। परशुराम जैसे ही शेष नाग का सिर लाने के लिए निकले उन्हें शिव धनुष टूटने की आवाज आई।

परशुराम को पता चला कि शेषनाग ने राम के भाई लक्ष्मण के रूप में धरती पर जन्म लिया है और इस वक्त शेषनाग राजा जनक के दरबार में है। परशुराम भी वहां पहुंचे उन्होंने कई बार लक्ष्मण के सिर को काटने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए।

आखिरकार उन्हें पता चला की राम ही भगवान विष्णु है। भगवान विष्णु के प्रति श्रद्धा और प्रेम भाव के कारण उन्होंने लक्ष्मण का सिर काटने की मंशा मन से निकाल दी। इस प्रकार भगवान परशुराम गुरु दक्षिणा कभी नहीं दे पाए। महादेव ने परशुराम के गुस्से को शांत करने के उद्देश्य से यह दक्षिणा मांगी थी।

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