एक लाख छिद्रों वाले लक्ष्मणेश्वर शिव मंदिर की है महिमा अपार, पढ़ें मंदिर का इतिहास

प्रदेश में महादेव के अद्भूत व अलौकिक मंदिरों का निर्माण प्राचीन समय से ही हुआ है। महादेव की महिमा को जानने वाले यहां के ऐतिहासिक शिव मंदिरों में महादेव की पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते है। उन्हीं प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है छत्तीसगढ़ की काशी कहे जाने वाले खरौद में है। नाम है लक्ष्मणेश्वर शिव मंदिर। इस मंदिर में स्थापित महादेव के शिव लिंग की महिमा अपार है। जिसे बहुत कम लोग ही जानते है। मंदिर में स्थापित शिव लिंग में एक लाख छिद्र है। माना जाता है कि महादेव के इस मंदिर में भगवान राम के अनुज लक्ष्मण ने पूजा-अर्चना की थी। इस लेख के माध्यम से मंदिर का इतिहास व इस मंदिर के निर्माण के पीछे की पौराणिक कथा को बता रहे है।


0 लक्ष्मण ने यहां की थी महादेव की आराधना
इस मंदिर के विषय में किवदंती है कि इस मंदिर में स्थापित महादेव के शिवलिंग को राम के अनुज लक्ष्मण ने स्थापित किया था। जब भगवान राम व रावण का युद्ध हो रहा था तब मेघनाथ ने शक्ति बाण का प्रयोग कर लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया था। तब हनुमानजी ने संजीवनी बूटी लाकर सुसेन वैद्य के द्वारा उपचार कराया था जिससे लक्ष्मण ठीक हो गए थे लेकिन उनके शरीर की पीड़ा खत्म नहीं हुई। तब महादेव की पूजा-अर्चना कर तप किया और महादेव से आर्शीवाद प्राप्त किया। भगवान शंकर के आर्शीवाद से लक्ष्मण ने दर्द से मुक्ति पाई। तब से यहां पर मंदिर का निर्माण कराया गया और यह मंदिर लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।


0 लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से है प्रसिद्ध
जिस तरह से रामेश्वरम में महादेव की आराधना भगवान राम ने कर रामेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हुए। उसी तरह से छत्तीसगढ़ के खरौद नामक नगर पंचायत में राम भगवान के अनुज लक्ष्मण ने महादेव की आराधना की और यहां महादेव लक्ष्मणेश्वर के रूप में विराजमान हुए।


0 1 लाख छिद्रों वाला है महादेव का शिव लिंग
इस मंदिर के शिव लिंग की विशेषता है कि इसमें 1 लाख छिद्र है। इसमें महादेव को अर्पित किया गया जल छिद्रों के माध्यम से गंगा, यमुना व पाताल लोक में पहुंचता है। यहां जो भी शिव भक्त पहुंचकर महादेव को जल अर्पित करता है उसकी समस्त मनोरथ महादेव पूर्ण करते है।


0 खर-दूषण का किया था वध
छत्तीसगढ़ की इस नगरी को काशी कहा जाता है छत्तीसगढ़ के काशी के नाम से यह जगह प्रचलित है। मान्यता है कि भगवान राम ने इस स्थान पर ही खर और दूषण नाम के दो असुरों का वध किया था। इसी कारण से इस नगर का नाम खरौद पड़ा।

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