पितृ पक्ष कब प्रारंभ हो रहा है, जाने श्राद्ध की तिथि के विषय में

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पितृ पक्ष पितरों को समर्पित तिथि माना जाता है। साल भर में एक ऐसा पक्ष होता है। जो पूरी तरह से पूर्वजों को याद करते हुए समर्पित किया जाता है। तर्पण, आहवान व श्राद्ध करते हुए पितरों के आत्मा को तृप्त करने की विधि पूरी की जाती है।

इस लेख के माध्यम से हम पितृ पक्ष के महत्व व तिथि के विषय में विस्तार से बताएंगे।

पितृ पक्ष वह समय होता है। जब हमारे पूर्वज धरती पर होते है। हम श्राद्ध कर्म के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करते है।

क्योंकि यदि हमारे पितृ नाराज हो जाते है। तो देवी-देवता भी नाराज हो जाते है। जीवन में कई प्रकार के संकट हमें घेर लेते है।

पितृ पक्ष की तिथियां

पितृ पक्ष प्रारंभ -1 सितंबर 2020

पहला श्राद्ध-2 सितंबर 2020

दूसरा श्राद्ध-3 सितंबर 2020

तीसरा श्राद्ध-4 सितंबर 2020

4था श्राद्ध-5 सितंबर 2020

पांचवा श्राद्ध-़6 सितंबर 2020

सातवां श्राद्ध-8 सितंबर 2020

आंठवा श्राद्ध-9 सितंबर 2020

नौवां श्राद्ध-10 सितंबर 2020

दसवां श्राद्ध-11 सितबंर 2020

ग्यारहवां श्राद्ध-12 सितंबर 2020

बारहवां श्राद्ध-13 सितंबर 2020

तेरहवां श्राद्ध-14 सितंबर 2020

14वा श्राद्ध-15 सितंबर 2020

पंद्रहवां श्राद्ध-16 सितंबर 2020

सोलवां श्राद्ध-17 सितंबर 2020 सर्वपितृ अमावस्या

पितृ पक्ष का महत्व

शास्त्रों के अनुसार किसी भी जातक को कोई भी काम करने से पहले अपने पूर्वजों का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। माना जाता है कि जिस घर के पितृ अपने परिवार के लोग से खुश रहते है। उस घर के लोगों को देवी-देवताओं का आशीर्वाद भी प्राप्त होता रहता है।

हमारे देश में बुजुर्गों को भगवान के बराबर महत्व दिया जाता है। इसी कारण से उनके मरणोपरांत उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है। गरूड़ पुराण के अनुसार जब तक पितरों का तर्पण नहीं किया जाता। तब तक उन्हें पितृ लोक में जगह नहीं मिलती है। उनकी आत्मा भी निरंतर भटकती रहती है। ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक भी जिन लोगों को पितृ उनसे प्रसन्न नहीं होते।

उन्हें पितृ दोष का श्राप मिलता है। जिस भी घर में पितृ दोष का श्राप लगता है। उस घर के सदस्य कभी भी सुखी नहीं रहते। न ही वह जीवन में सफलता को प्राप्त करते है। इसी कारण से पितृ पक्ष में पितरों का तर्पण किया जाता है। उनसे क्षमायाचना की जाती हे।

पितृ पक्ष में श्राद्ध विधि

श्राद्ध कर्म के दिन साधक को सुबह जल्दी उठना चाहिए। बिना सिले वस्त्र धारण करने चाहिए। श्राद्ध में तिल, चावल व जौ को विशेष रूप से सम्मिलित करे। इसके बाद अपने पितरों का पसंदीदा भोजन बनवाएं तिल उन्हें अर्पित करे।

तिल अर्पित करने के बाद पितरों के भोजन की पिंडी बनाकर उन्हें अर्पित करे। इसके बाद अपने भांजे और ब्राम्हण को भोजन कराकर उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दे। अंत में कौओं को भोजन अवश्य कराएं। क्योंकि पितृ पक्ष में कौए को पितरों का रूप माना जाता है।

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