पुरुषोत्तम मास में क्या करे और क्या न करे, जाने इस लेख से

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नव संवत्सर 2077 में इस बार तीन साल बाद एक माह अधिकमास का भी होगा। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

संवत्सर के अनुसार इसमें 12 की बजाए 13 महीने होंगे। यह संयोग हर तीन साल में एक बार आता है।

पंडित महेश्वर प्रसाद उपाध्याय के मुताबिक इस बार आश्विन मास के दो महीने होंगे। आश्विन मास 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा।

यानी इसकी अवधि करीब दो महा रहेगी। इन दो माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिकमास रहेगा।

पितृमोक्ष अमावस्या के बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक पुरुषोत्तम मास रहेगा।

इस कारण 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू होगा। वहीं जानकारों के मुताबिक 13वां माह पुरुषोत्तम मास रहेगा।

लेकिन इसके कारण विवाह के मुहूर्त में कोई बाधा नहीं रहेगी।

पुरुषोत्तम मास के बाद जितने भी त्योहार आएंगे वे 10 से 15 दिन या इससे कुछ अधिक विलंब से आएंगे। दीपावली इस बार 14 नवंबर को होगी।

देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को होगी।

ऐसे बनता है पुरुषोत्तम मास

सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते है। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम मास आता है।

वशिष्ट सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिन्दू कैलेंडर सूर्य मास , चंद्रमास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है।

जो हर 32 माह, 16 दिन व 8 घंटे के अंतर में आता है।

इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष व चंद्र वर्ष के बीच का अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है।

भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन करीब 6 घंटे का होता है।

वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इस तरह से ही तीन साल में एक माह अधिक बन जाता है।

ऐसे पड़ा पुरुषोत्तम मास नाम

अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते है। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है।

इसलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है।

इस विषय में जुड़ी एक रोचक कथा पुराणों में है। भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से हर चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किए।

चूंकि अधिकमास सूर्य और चंद्र मास के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रकट हुआ तो इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुआ। ऐसे में ऋषि मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया।

वे ही इस मास का भार अपने ऊपर ले। भगवान विष्णु ने स्वीकार कर लिया। तब से इस माह को पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है।

क्या करे अधिकमास में

आमतौर पर अधिकमास में हिन्दू धर्म के लोग व्रत उपवास, पूजा -पाठ, ध्यान, भजन, कीर्तन व मनन करते हुए दिनचर्या बनाते है।

पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ-हवन के अलावा श्रीमद् देवी भागवत, श्री भागवत महापुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण,

पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। इसके अलाव इस माह के अधिष्ठाता विष्णु के मंत्रों का जाप करना चाहिए।

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