चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने के पीछे क्या है कारण, जाने विस्तार से

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भारतीय सभ्यता और संस्कृति में पैर छूने की परंपरा है। हम जब भी किसी विद्वान या उम्र में बड़े व्यक्ति से मिलते है तो उनका अभिवादन पैर छू कर करते है।

इस परंपरा को मान-सम्मान के नजरिए से देखा जाता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने चरण स्पर्श करने के पीछे को केवल परंपरा नहीं बल्कि इसे पीछे सकरात्मक ऊर्जा का संचार होना बताया है।

इस लेख के माध्यम से हम चरण स्पर्श करने के पीछे के वास्तविक कारण को बताएंगे।

चरण स्पर्श की क्रिया में बनता है विद्युतीय ऊर्जा का चक्र

शरीर में मस्तिष्क से लेकर पैरों तक लगातार ऊर्जा का संचार होता है। इसे काॅस्मिक ऊर्जा कहा जाता है।

इस तरह से जब हम किसी व्यक्ति के पैर छूते है तो उससे ऊर्जा ले रहे होते है। सामने वाले के पैरों से ऊर्जा का प्रवाह हाथों के जरिए हमारे शरीर में पहुंचता है।

पैरों के अलावा हम शरीर का कोई और हिस्सा छूकर आशीर्वाद न लेने इसके पीछे भी वैज्ञानिक कारण है।

जब हम सही प्रक्रिया के साथ चरण स्पर्श करते है तो कमर झुकाते है और अपने बाएं हाथ की अंगुलियों से सामने वाले के दाएं पैर और दाएं हाथ की अंगुलियों से बाएं पैर छूते है।

इसके पीछे वैज्ञानिक व्याख्या ये है कि हमारा शरीर बहुत सारी तंत्रिकाओं से मिलकर बना है। ये तंत्रिका हमारे मस्तिष्क से शुरू होती है वो हमारे हाथों और पैरों की अंगुलियों पर खत्म होती है।

इस प्रक्रिया में जब हम अंगुलियों से उल्टे तरफ के पैर छूते है तो इस तरह शरीर में विद्युतीय ऊर्जा का चक्र बन जाता है। साथ ही सामने वाले के शरीर की ऊर्जा हमारे अंदर प्रवेश करती है।

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