दशहरा का जाने महत्व, कैसे पड़ा विजयादशमी नाम यह भी जाने

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शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद दशहरा का पर्व मनाया जाता है। दशहरा को विजयादशमी या आयुध पूजा के भी नाम से जाना जाता है। दशहरा पर्व हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाने की परंपरा है।

इस बार दशहरा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस लेख के माध्यम से हम दशहरा पर्व के महत्व को बताएंगे। साथ ही इसका नाम विजयादशमी कैसे पड़ा इस पर भी विस्तार से जानकारी देंगे।

ऐसे पड़ा दशहरा का नाम

विजयादशमी ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि एक कथा के अनुसार रावन ने देवी सीता का हरण कर लिया था। देवी सीता जो एक महारानी थी। जब उनका हरण रावण कर सकता था तो अन्य स्त्रियों की उस समय क्या स्थिति रही होगी।

नारी जाति के सम्मान और मर्यादा की रक्षा के लिए भगवान श्री राम ने अधर्मी और अन्यायी रावण को युद्ध के लिए ललकारा और दस दिनों तक रावण से युद्ध किया। आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को भगवान राम ने मां दुर्गा से प्राप्त दिव्यास्त्र की सहायता से रावण का वध कर दिया।

दस सिर वाले रावण का अंथत हो गया। इसे असत्य पर न्याय और सत्य की जीत के उत्सव के रूप में मनाया गया। रावण पर राम को विजय प्राप्त हुई थी। इसलिए यह तिथि विजयादशमी कहलाई। दस सिर वाला रावण इस दिन हारा था इस वजह से दशहरा भी कहते है।

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मां दुर्गा ने बनाया है इस तिथि को

दुर्गा सप्तशती के मध्यम चरित्र में मां दुर्गा और महिषासुर के वध की कथा है। इस असुर ने देवताओं को भी स्वर्ग से भगा दिया था। इसके अत्याचार से पृथ्वी पर हाहाकार मचा हुआ था।

देवी ने आश्विन शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को महिषासुर का अंत करके पृथ्वी को पाप के भार से मुक्त कर दिया था। देवी की विजय से प्रसन्न होकर देवताओं ने विजया देवी की पूजा की और यह तिथि विजयादशमी कहलाईं

प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा उत्सव

प्राचीन काल से ही राजागण दशहरे को विजया उत्सव के रूप में मनाते थे। इस दिन राजा विजया देवी की प्रार्थना कर रण यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। विजयादशमी के दिन राजा अपनी सीमा को बढ़ाने के लिए दूसरे देश के राजाओं पर आक्रमण भी किया करते थे।

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