धरती पर कलियुग का आगमन कैसे हुआ ,जाने पूरी कहानी

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पृथ्वी पर चार युग की बात पुराणों में उल्लेखित है। सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग व कलियुग इन चारों युग के विशय में कहा गया है कि जब भी पृथ्वी संकट में होगी श्रीहरि विश्णु अवतरित होंगे और पृथ्वी की रक्षा करेंगे।

सतयुग में प्रभु कई अवतार लेकर अवतरित हुए थे। जिसमें मतस्य, वराह, नृसिंह ,वामन सहित कई अवतार की कथा में वर्णन है। इसी तरह से त्रेतायुग में भगवान राम के रूप में अवतरित हुए थे।

द्वापर में श्रीकृष्ण का रूप लेकर अवतरित हुए थे। वर्तमान युग को कलियुग कहा जाता है। लेकिन यह कलियुग का आमगन कैसे हुआ और कलियुग क्या है इस विषय में लेख के माध्यम से बताएंगे।

महाभारत के बाद जब पांडव ने अपना राज्य स्थापित करके सन्यासआश्रम के लिए हिमालय जाने का निर्णय लिया था। तब अपना राज.पाठ अपने पौत्र राजा परीक्षित को सौंप दिया था।

राजा परीक्षित की कथा तो सभी जानते है। राजा परीक्षित एक अच्छे व कुशल शासक थे। उन्होंने अपने राज में प्रजा के हित को ध्यान में रखते हुए धर्म की रक्षा की थी।

लेकिन राजा के लाख मेहनत व कुशल शासक होने के बाद भी कलियुग आ ही गया। कलियुग के आने के पीछे की कथा है।

यह है पौराणिक कथा

राजा परीक्षित अपना शासन कर रहे थे उन दिनों स्वयं धर्म, बैल का रूप् लेकर गाय के रूप में बैठी पृथ्वी देव से सरस्वती देवी नदी के किनारे मिले। गाय रूपी पृथ्वी के नयन आंसूओं से भरे हुए थे, उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

पृथ्वी देवी को रोता देख धर्म रूपी बैल ने पूछा कि क्या हुआ क्यों रो रही हो। तब उसने कहा कि हे धर्म तुम तो सब जानते हो भगवान श्री कृष्ण के स्वधाम जाने से

सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, संतोष, त्याग, शास्त्र विचार, ज्ञान, वैराग्य, शौर्य ,तेज, ऐश्वर्य, कांति, कौशल, स्वतंत्रता, निर्भीकता, कोमलता, धैर्य, साहस, उत्साह, कीर्ति, आस्तिकता, स्थिरता, गौरव, अहंकारहीनता सभी गुण पर कलियुग ने कब्जा कर लिया है।

पहले भगवान श्रीकृष्ण के चरण मुझ पर पड़ते थे जिसके कारण मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती थी लेकिन अब तो मेरा सौभाग्य समाप्त हो गया। धर्म और पृथ्वी आपस में बात कर रही रहे थे

कि इतने में असुरी रूपी कलियुग वहां आ पहुंचा और बैल और गाय रूपी धर्म और पृथ्वी को मारने लगा। राजा परीक्षित वहां से गुजर रहे थे जब उन्होंने यह दृश्य देखा तो कलियुग पर क्रोधित हुए।

अपने धनुष बाण रखते हुए कलियुग से कहा दुष्ट पापी तू कौन है इस निरीह गाय तथा बैल को क्यों सता रहा है तू महान अपराधी है तेरा अपराध क्षमा के योग्य नहीं है तेरा वध निश्चत है।

राजा परीक्षित ने पृथ्वी देवी को पहचान लिया और उनकी रक्षा करने की बात कही। साथ ही उनके रहते कलियुग का प्रवेश नहीं होने देने का भी वचन दिया। इस दौरान कलियुग से उनका युद्ध हुआ।

कलियुग ने मांगी राजा से क्षमा

युद्ध में पराजित होने के बाद कलियुग ने राजा परीक्षित से क्षमा मांगी और चरणों में गिर गए। राजा परीक्षित ने कहा कि तू वापस लौट जहां से भी आया है।

तब कलियुग ने कहा कि हे राजन मेरा आना तो तय है तब परीक्षित ने कहा जब तक मेरा राज है मै। तूझे आने नहीं दूंगा तू वापस जा।

तब कलियुग ने कहा हे राजन पूरे पृथ्वी में तो आपका ही राज है कोई भी स्थान नहीं है जहां मैं रह सकूं। राजन मुझे कुछ तो स्थान दीजिए जहां आपका राज न हो।

तब कलियुग के कहने पर राजा परीक्षित ने सोच.विचार के कहा कि झूठ,द्यूत, मद्यपान, परस्त्रीगमन और हिंसा इन चार स्थान में असत्य, मद, काम और क्रोध का निवास होता है। तू इन चार स्थान पर रह सकता है।

स्वर्ण में मांगा कलियुग ने स्थान

कलियुग ने राजा परीक्षित से कहा कि हे राजन ये चार स्थान मेरे रहने के लिए अपर्याप्त है अन्य स्थान भी प्रदान कीजिए।

तब राजा ने स्वर्ण पांचवां स्थान उसे रहने दिया। जब कलियुग स्वर्ण में रहने लगा तब राजा के सोने के मुकुट में जा बैठा।

स्वर्ण के मुकुट में जाने के बाद राजा परीक्षित का मति भ्रम कर दिया। जिससे तप कर रहे ऋशि पर क्रोधित होकर राजा परीक्षित ने सर्प ऋशि पर रख दिया

और श्राप के कारण परीक्षित की मृत्यु हुई। तब कलियुग आ गया पूरी तरह से पृथ्वी में।

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