छठ पूजा कब शुरू हो रही, जाने विस्तार से

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छठ पूजा की शुरुआत दो दिन पहले चतुर्थी तिथि को नहाय खाए से होती है। फिर पंचमी को खरना होता है। जिसके बाद षष्ठी तिथि को छठ पूजा होती है। जिसमें सूर्य देव को शाम में अघ्र्य अर्पित किया जाता है।

दीपावली का पर्व खत्म होने के तुरंत बाद से ही छठ पर्व की तैयारी शुरू हो जाती है। इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से शुरू हो रही है। इस लेख के माध्यम से हम छठ पर्व के महत्व व पूजा विधि को विस्तार से बताएंगे।

कार्तिक मास के षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। यह बहुत ही कठोर व्रत माना गया है जिसमें 36 घंटे का व्रत कर व्रती सूर्य देव की विधि-विधान से आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करता है। चतुर्थी से नहाय खाए होती है फिर खरना उसके बाद संध्या अघ्र्य और उषा अघ्र्य की विधि से व्रत पूर्ण होता है।

पहला दिन नहाय खाय

छठ पूजा की शुरूआत चतुर्थी तिथि से होती हैै ये छठ पूजा का सबसे पहला दिन होता है। इस दिन नहाय खाए होता है। इस साल नहाय खाए 18 नवंबर को होगा।

जहां इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 46 मिनट पर होगी और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 25 मिनट पर होगी।

दूसरा दिन खरना

दूसरा दिन खरना का होता है। ये कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होती है। इस वर्ष खरना 19 नवंबर को है।

इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 47 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 26 मिनट पर होगा।

तीसरा दिन छठ पूजा व संध्या अघ्र्य

छठ पूजा का मुख्य दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी की तिथि होती है। इस दिन छठ पूजा होती है। इस दिन शाम को सूर्य को अघ्र्य दिया जाता हे। इस वर्ष छठ पूजा 20 नवंबर को हैै।

सूर्योदय 6 बजकर 48 मिनट पर होगी और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 26 मिनट पर होगा। छठ पूजा के लिए षष्ठी तिथि का प्रारंभ 19 नवंबर को रात 9 बजकर 59 बजे से हो रहा है।

जो 20 नवंबर को रात 9 बजकर 29 बजे तक रहेगा।

4था दिन सूर्योदय अघ्र्य व पारण

छठ पूजा का अंतिम दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि होती है। इस दिन सूर्योदय के समय सूर्य देव को अघ्र्य अर्पित किया जाता है। उसके बाद पारण कर व्रत को पूरा किया जाता है।

इस वर्ष छठ पूजा का सूर्योदय अघ्र्य तथा पारण 21 नवंबर को होगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम को 5 बजकर 25 मिनट पर होगा।

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