रथ यात्रा उत्सव कैसे शुरू हुआ, जाने पूरी कहानी

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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा उत्सव का आयोजन हर साल किया जाता है। पुरी जगन्नाथ मंदिर का रथ यात्रा उत्सव सबसे खास माना जाता है। जहां पर हजारों-लाखों की संख्या में श्रद्धालु जगत के पालनहार प्रभु जगन्नाथ के रथ को खिंचने के लिए पहुंचते है। लेकिन इस रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत कैसे हुई इस विषय में बहुत कम लोग जानते है।
रथ यात्रा उत्सव का इतिहास बहुत पुराना है। इस यात्रा में महाप्रभु तो शामिल होते ही है उनके साथ बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र भी शामिल होते है।

० रथ यात्रा उत्सव का इतिहास
रथ यात्रा उत्सव से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं है लेकिन पुराणों में जो वर्णन है। उसके मुताबिक प्रचलित कथा यह है कि एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने प्रभु से नगर देखने की चाह रखते हुए द्वारिका के दर्शन कराने के लिए प्रार्थना की। इसके बाद भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया। भगवान जगन्नाथ को रथ में बहन व भाई बलभद्र के साथ नगर वासियों ने जब देखा तो वे लोग उनका स्वागत जगह-जगह पुष्प वर्षा व जयघोष करते हुए किया। तब से ही इस रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत हुई थी। इस रथ यात्रा उत्सव का वर्णन स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्मपुराण में है। इसलिए यह रथ यात्रा बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है।

० रथ यात्रा उत्सव का इतिहास
रथ यात्रा उत्सव से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं है लेकिन पुराणों में जो वर्णन है। उसके मुताबिक प्रचलित कथा यह है कि एक दिन भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने प्रभु से नगर देखने की चाह रखते हुए द्वारिका के दर्शन कराने के लिए प्रार्थना की। इसके बाद भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन सुभद्रा को रथ पर बैठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया। भगवान जगन्नाथ को रथ में बहन व भाई बलभद्र के साथ नगर वासियों ने जब देखा तो वे लोग उनका स्वागत जगह-जगह पुष्प वर्षा व जयघोष करते हुए किया। तब से ही इस रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत हुई थी। इस रथ यात्रा उत्सव का वर्णन स्कंद पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण, ब्रह्मपुराण में है। इसलिए यह रथ यात्रा बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है।

० यहां होती है पूरे परिवार की पूजा
भगवान जगन्नाथ का ही एकलौता मंदिर है जहां पर भगवान की पूजा तो होती ही है। साथ ही साथ उनके परिवार की भी पूजा होती है। जहां कहीं भी भगवान जगन्नाथ का मंदिर है वहां पर भगवान के साथ बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र भी होते है। सभी की विधि-विधान से पूजा होती है।

० भव्य रथों में करते है नगर भ्रमण
देश भर में जहां भी जगन्नाथ मंदिर है वहां पर रथ यात्रा उत्सव मनाया जाता है। लेकिन पुरी जगन्नाथ के रथ यात्रा उत्सव की भव्यता खास है। यहां पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र तीनों अलग-अलग रथ पर सवार होते है।
० भाई-बहन के स्नेह को दर्शाता है उत्सव
रक्षा बंधन को स्नेह का पर्व माना गया है लेकिन प्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा उत्सव में भाई-बहन के प्रेम को साफ-साफ देखा जा सकता है। जहां पर बहन सुभद्रा के साथ भगवान जगन्नाथ व बड़े भाई बलभद्र साथ नगर भ्रमण करते है।

छेरा पहरा की होती है खास रस्म
इस रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत से पहले राजा गजपति के द्वारा छेरा पहरा की रस्म अदा की जाती है। जिसमें राजा अपने पालकी में सवार होकर आते है। फिर वे तीनों की विधि-विधान से पूजा करने के बाद सोने के झाडू से रथ के चारों ओर को साफ करते है। तब जाकर रथयात्रा शुरू होती है।

5 COMMENTS

  1. इस article को पढ़ने के बाद मुझे बहुत सारी जानकारी प्राप्त हुई । इस लेख के लिए धन्यवाद।

  2. अच्छी जानकारी है खास कर नई पीढ़ी को इसका लाभ मिलेगा

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