कल्चुरी राजाओं ने बनाया था रतनपुर के गज किला को, जाने इतिहास

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रतनपुर को शिव व शक्ति की नगरी के तौर पर जाना जाता है लेकिन यहां पर प्राचीन, ऐतिहासिक स्थापत्य कला की सुंदरता भी देखने को मिलती हैं। कई महल व प्राचीन मंदिर भी देखने को मिलती है। सालों साल बाद भी इसकी सुंदरता लोगों को आकर्षित करती है और इसको देखने के लिए देश के अलावा विदेशों से पर्यटक आते है कल्चुरी राजाओं की स्थापत्य कला इसके हर कोने में नजर आती है। इस लेख के माध्यम से हम इस किले के विषय में बताएंगे।


पुराना बस स्टैण्ड के पास रतनपुर के पास राजमार्ग से लगा हुआ ऐतिहासिक किला हाथी अथवा गज किले के नाम से जाना जाता है। यह जीर्ण-शीर्ण स्थिति में पहुंच गया है। जिसे वर्तमान में पुराने स्थिति में लाने का प्रयास पुरातत्व विभाग कर रहा है। इसका देख-रेख कर इसकी सुंदरता व प्राचीनता को संजोय रखने का प्रयास कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस किले की सुंदरता यहां आने वाले पर्यटक के हृदय में हमेशा ही रहती है। किले में भव्य कुंड व कई कुएं दिखाई देते है। सभी को पाट दिया गया है किला अपने आप में ही राजा-महाराजाओं के ठाठ-बाठ को दशार्ता है। यह किला रतनपुर की प्रमुख पहचान है।

किले में है कई मंदिर व मूर्तियां

इस किले में कई आकर्शक मूर्तियों के साथ ही प्राचीन मंदिर है खास तौर पर सबसे प्राचीन मंदिर लक्ष्मीनारायण मंदिर, जगन्नाथ मंदिर है। यहां नए कलेवर में भगवान जगन्नाथ की स्थापना करते हुए मां महामाया मंदिर समिति के द्वारा देख रेख की जा रही है।

रावण का सिर काटती कलाकृति है खास

इस किले में कई सुंदर-सुंदर कलाकृतियां है। जिसमें रावण की शिव की भक्ति करते हुए कई कलाकृति है। उसमें एक कलाकृति रावण द्वारा अपने सिर को काटकर महादेव को अर्पित करते हुए है। जो बहुत ही आकर्षित करती है। इस मूर्ति के विषय में छत्तीसगढ़ पीएससी व व्यापम के परीक्षाओं में भी इसका प्रश्न आता है।

गज किले का इतिहास

गज किले के निर्माण के विषय में कहा जाता है कि इसका निर्माण लगभग 10वीं व 12वीं सदी के बीच कल्चुरी राजाओं ने कराया था। इसकी शिल्प व हस्त कला को देखकर इसकी प्राचीनता का पता चलता है। इसे स्नानागार व पूजन गृह के रूप में कल्चुरी राजाओं ने इस्तमाल किया था।

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