इस वर्ष जन्माष्टमी दो दिन, इस विधि से करे पूजा मिलेगा दो गुणा फल

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व दो दिन मनाया जाएगा। ज्यादातर पंचागों में 11 और 12 अगस्त को जन्माष्टमी है। इस बार जन्माष्टमी में विशेष योग बन रहा है। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से दो गुणा फल मिलेगा। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक 12 अगस्त पर कृतिका नक्षत्र लगेगा। यहीं नहीं चंद्रमा मेष राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। कृतिका नक्षत्र और राशियों की इस स्थिति से वृद्धि योग निर्मित हो रहा है। ऐसे योग में पूजन करना बहुत ही उत्तम होगा।

इस दिन शुरू हो रही जन्माष्टमी की तिथि

अष्टमी की तिथि 11 अगस्त मंगलवार को सुबह नौ बजकर 6 मिनट से शुरू हो रही है। यह तिथि 12 अस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। वैष्णव जन्माष्टमी के लिए 12 अगस्त का शुभ मुहूर्त बताया जा रहा है। बुधवार की रात 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक बाल-गोपाल की पूजा-अर्चना की जा सकती है। इस वर्ष कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे है। 11 अगस्त को सूर्योदय के बाद ही अष्टमी की तिथि प्रारंभ हो रही है। इस दिन यह तिथि पूरे दिन और रात में रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। ऐसे में नक्षत्र और तिथि का यह संयोग इस बार एक दिन पर नहीं बन रहा है।

भागवत महापुराण में है उल्लेखित

श्रीमद् भावगत महापुराण के दशम स्कंध में कृष्ण जन्म प्रसंग में उल्लेख मिलता है कि अर्धरात्रि में जिस समय पृथ्वी पर कृष्ण अवतरित हुए थे उसी समय ब्रज में घनघोर बादल छाए थे। लेकिन चंद्रदेव ने अपनी दिव्य दृष्टि से अपन वंशज को जन्म लेते हुए देखा था। यही कारण है कि श्रीकृष्ण का जन्म अर्धरात्रि में चंद्रमा उदय के साथ होता है। हिन्दू कैलेण्डर के अनुसार इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण अश्टमी की तिथि की शुरूआत 11 अगस्त को सुबह 9 बजकर 6 मिनट से 12 अगस्त को 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। वहीं अगर रोहिणी नक्षत्र की बात करे तो इसकी शुरूआत 13 अगस्त को तड़के 3 बजकर 27 मिनट से होगी और इसका समापन 5 बजकर 22 मिनट पर होगा।

दो दिन हो तो उलझन से ऐसे बचे

शास्त्रों में इस तरह से एक ही व्रत या पूजन के लिए दो तिथि होने पर उलझन से बचने के उपाय भी बताए गया है। हिन्दू धर्म में सूर्योदय से दिन की शुरूआत व व्रत व त्योहार की भी शुरूआत मानी जाती है। चूंकि कोई भी व्रत व त्योहार में जब तिथि सूर्योदय की हो तब उस पूरे दिन को उस तिथि का ही माना जाता है। इसलिए यदि सूर्योदय की तिथि के महत्व को देखा जाएगा तो 12 अगस्त को जन्माष्टमी होगा। वहीं कुछ लोग सिर्फ तिथि को महत्व देते है। ऐसे में जो तिथि को महत्व देते है वे अपने मन के मुताबिक श्रद्धा भाव से उस तिथि लगने के बाद से ही इस व्रत को कर सकते है। गृहस्थ लोगों के लिए 11 अगस्त को व्रत करना उत्तम रहेगा।

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