धीमी हुई भगवान के रथ की गति, सादगी से होगा परंपरा का निर्वहन

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रेलवे क्षेत्र स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा उत्सव बड़े ही धूमधाम से पुरी जगन्नाथ के तर्ज पर ही मनाया जाता है। लेकिन इस बार भगवान जगन्नाथ का रथ रूक गया है। भक्त रथ खिंचने नहीं पहुंच सकते है। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार सादगी से होगा परंपरा का निर्वहन
रेलवे क्षेत्र में इस मंदिर का निर्माण 1996 में किया गया था। तब से ही मंदिर में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा का उत्सव मनाया जाता रहा है। इस वर्ष भगवान श्री जगन्नाथ के रथ के पहिए रूक गए है। सिर्फ परंपरा का निर्वहन किया जाएगा।

० नवजोबन उत्सव पर दिए भक्तों को दर्शन
श्री जगन्नाथ मंदिर कोरोना संक्रमण के कारण पहले से ही बंद था। फिर स्नान पूर्णिमा के बाद मंदिर का पट खुला ही नहीं। वहीं ग्रहण के चलते भक्तों को एक दिन और इंतजार करना पड़ा। भक्तों का इंतजार नवजोबन उत्सव के दिन सोमवार को दर्शन कर खत्म हुआ। इस तरह से पहली बार हुआ है जब भगवान के दर्शन के लिए भक्तों को इतना इंतजार करना पड़ा है।

० हर साल बताते है प्रभु संक्रमण से बचने का तरीका
महाप्रभु जगन्नाथ ने कोरोना काल हो या अन्य महामारी पहले से ही लोगों को बचने का तरीका बताया है। भगवान के अस्वस्थ्य होने की विधि के माध्यम से ही लोगों को बताया है कि अस्वस्थ हो तो एकांतवास में रहे।
० मनुष्यों की दिनचर्या को समझते है प्रभु
महाप्रभु जगन्नाथ भगवान श्री हरि विष्णु ही है। जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण का ही रूप माने गए है। भगवान जगन्नाथ साल भर मनुष्यों की तरह ही दिनचर्या करते है। वे मनुष्यों की तरह दिनचर्या कर मनुष्यों को समझते है और मनुष्यों को जीवन में सुख-दुख हर परिस्थिति में जीवन जीने के लिए प्रेरित करते है।
० नर तक पहुंचते है नारायण
महाप्रभु जगन्नाथ के बहुत भक्त है। हर कोई उनके दर्शन नहीं कर पाता है एेसे में रथयात्रा उत्सव के माध्यम से वे अपने हर एक भक्त तक पहुंचते है। ताकि भक्त उनके दर्शन कर सके।

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