इस्काॅन का पहला मंदिर बना था भारत से बाहर, जाने विदेश में श्रीकृष्ण की महिमा

1

हिन्दू धर्म को मानने वाले भारत देश में सबसे अधिक है। 33 कोटी देवी-देवताओं के ऊपर ही ज्ञान, विज्ञान, ज्योतिष हर एक चीज की गणना करते हुए सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम भगवान को ही माना जाता है।

जिसमें श्री हरि विष्णु व महादेव के अवतार मनुष्यों के लिए आदर्श बनकर उन्हें जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते है। उन्हीं में से एक देव है श्री कृष्ण। श्रीकृष्ण के भक्त सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है।

इसके लिए एक समूह है इस्काॅन। इसके माध्यम से ही श्रीकृष्ण भक्त एकत्रित होकर प्रभु की महिमा गाते है। इस्काॅन का पहला मंदिर भारत में नहीं बल्कि अंग्रेजों ने न्यूर्याक में बनाया था। इस लेख के माध्यम से हम इस्काॅन के विषय में विस्तार से बताएंगे।

दुनिया के पहले इस्काॅन मंदिर का निर्माण 1966 में न्यूयाॅर्क में हुआ था। इस मंदिर की स्थापना श्रीकृष्ण कृपा श्रीमूर्ति अभय चरणाविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने की थी। इस्काॅन का पूरा नाम इंटरनेषनल सोसायटी फाॅर कृष्ण काॅनसिनेस है।

जिसे हिन्दी में अंतराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ या इस्काॅन कहा जाता है। इस मंदिर का पावन भजन हरे रामा हरे रामा कृष्णा है। जिसे विदेश के लोग भी गाते है।

इस लिए हुई मंदिर की स्थापना

भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को पूरे विश्व में पहुंचाने के लिए स्वामी प्रभुपाद पे इस्काॅन मंदिर की स्थापना की थी। प्रभुपाद का जन्म 1896 में कोलकाता में हुआ था।

साल 1968 में प्रयोग के तौर पर वर्जीनिया, अमेरिका की पहाड़ियों में नव-वृंदावन की स्थापना की गई थी। 14 नवंबर 1977 में उनका निधन प्रसिद्ध धार्मिक नगरी मथुरा के वृंदावन धाम हो गया था।

बैंगलोर में है सबसे बड़ा इस्काॅन मंदिर

विदेश में तो कई मंदिर है। लेकिन भारत के बैंगलोर शहर में जो इस्काॅन मंदिर है। वह सबसे बड़ा इस्काॅन मंदिर माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना साल 1977 में की गई थी।

वहीं साल 1975 में वृंदावन में इस्काॅन मंदिर की स्थापना की गई थी। इस मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने आते है। इस्काॅन का हेडक्वाटर पश्चिम बंगाल के मायापुर में है।

इसकी स्थापना 1972 में की गई थी। नई दिल्ली में 1984 में इस्काॅन मंदिर की स्थापना हुई थी। जबकी मुंबई में 1978 में इस्काॅन मंदिर की स्थापना की गई।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here