भारतीय सिंधु सभा महिला विंग ने दी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को श्रद्धांजलि

बिलासपुर. होना होता है, जिनको अमर, वो लोग तो मरते ही आए। औरों के लिए जीवन अपना, बलिदान वो करते ही आए। क्या मार सकेगी मौत उसे, औरों के लिए जो जीता है। मिलता है जहाँ का प्यार उसे, औरों के जो आँसू पीता है।

जीवन शाश्वत है, प्रेम अमर है, और मृत्यु की एक निर्धारित सीमा, सत्य स्वयँ हेतु रखना है प्रेम दुसरो के लिए, करुणा सभी के लिए जीवन का सत्य व्याकरण यही है और अपने जीवन का व्याकरण जीकर सिखाते सिखाते बिछड़ा कुछ ऐसी अदा से एक शख्स शहर ही नही देश की कहानी गढ़ गया।

अपनी चिर परिचित मोहक मुस्कान,सरलता, सौम्यता, नम्रता, स्नेह और शक्ति की मूरत केवल सिंधी समाज ही नही पूरे देश की शान परम् श्रधेय डॉ.दयाराम कलवानी जो स्वतंत्रता सेनानी राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित थेै।

अपनी खट्टी-मीठी यादों को छोड़ एक अंनत की यात्रा की ओर अग्रसर हो गए। भारतीय सिंधु सभा महिला विंग छत्तीसगढ़ ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय महामंत्री विनीता भावनानी ने उनके जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका अवसान समाज की अपूरणीय छति है।

जीवन एक युद्ध भूमि है, जीवन मे तन, मन, धन, जन आदि से परीक्षाएं आती ही है, भिन्न-भिन्न समस्याएं एवँ संघर्षों के बाद भी पूर्ण निष्ठा, समर्पित भाव से परिवार, समाज, और देश प्रति जिन्होंने अपना जीवन न्यौछावर कर दिया।

ऐसी विभूतियां हेतु सारी क़ायनात अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है।एक कवि की लिखी हुई कुछ पंक्तियां ऐसे समय में हिम्मत देती है प्रलय सृजन दोनो सेनानियों की गोद मे पलते है। पर्वत शीष झुका देता है इन वीरों की राहों में।

पुष्प अभिलाषित होते चरण वंदनी चाहों में। सागर सीना देता है, जिनकी चलती राहों में। ह्रदय लगाने को फैलाती भारत माता बाहों में। भारतीय सिंधु सभा छत्तीसगढ़ महिला विंग अश्रुपूरित भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

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