महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण के पास था गरूड़ध्वज नामक रथ, जो था अनोखा

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भगवान श्री कृष्ण 64 कलाओं में दक्ष थे। एक और वे सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे तो दूसरी ओर द्वंद युद्ध में भी माहिर थे। इसके अलावा उनके पास कई अस्त्र और शस्त्र थे। उनकी नारायणी सेना महाभारत काल की सबसे खतरनाक व ताकवर सेना थी। श्रीकृष्ण ने ही कलारिपट्टू नामक युद्ध कला इजाद की थी। जिसे आजकर मार्शल आर्ट कहते है।

श्रीकृष्ण के धनुष का नाम सारंग था। उनके खड्ग का नाम नंदक, गदा का नाम कौमोदकी और शंख का नाम पांचजन्य था। जो गुलाबी रंग का था। महाभारत में श्रीकृष्ण के पास 2 रथ थे। उनके रथ बहुत ही रहस्यमयी और अनोखे थे। इस लेख से हम उसका विस्तार से वर्णन करेंगे।

भगवान श्रीकृष्ण के रथ की खासियत

1.श्रीकृष्ण के पास 2 रथ थे। दोनों ही दिव्य रथ थे। पहले का नाम गरूड़ध्वज और दूसरे का नाम जैत्र था।

2.गरूड़ध्वज के सारथी का नाम दारूक था और उनके अश्वों का नाम शैव्य, सुग्रीव मेघपुष्प् था।

3.श्रीकृष्ण के जैत्र नाम के एक सेवक भी थे और रथ भी था। श्रीमद्भागवत महापुराण इन रथों का उल्लेख मिलता है।

4.गरूड़ध्वज रथ बहुत ही तेज गति से चलने वाला रथ था। रक्मणी का हरण इसी रथ पर सवार होकर किया गया था। कहते है कि यह रथ आंधी के वेग के समान मंदिर के पास क्षणभर के लिए रूका और श्रीकृष्ण ने राजकुमारी रूकमणी को तुरंत ही रथ पर बैठाया और रथ के अश्व पूरे वेग से दौड़ चले।

5.ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण यह रथ स्वर्ग से लेकर आए थे। बिहार के राजगीर में कुछ निशान है जिनका ताल्लुक महाभारत काल से है। इनमें से एक है श्रीकृष्ण के रथ के निशान। इसे लेकर ऐसी कहानी प्रचलित है कि श्रीकृष्ण महाभारत काल के दौरान अपना रथ स्वर्ग से यहां उतारे थे।

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