फ्रिज के जमाने में भी बेटी को मटका देने की चली आ रही परंपरा, जाने विस्तार से

समय बदल रहा है मनुष्य तकनीकी युग में पहुंच चुका है। जहां पर हर एक चीज तकनीक से बनाई जा रही है। भीषण गर्मी में कूलर, एसी के माध्यम से ठंडी हवा ली जा रही है। वहीं गर्मी में ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज का भी इस्तेमाल होने लगा है। लेकिन इन सब के बीच भी छत्तीसगढ़ में अक्षय तृतीया के दिन बेटियों को मटका दान करने की परंपरा चली आ रही है।

बेटियों को दान करना होता है पुण्यकारी

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी के मुताबिक अक्षय तृतीया का दिन दान करने के लिए सर्वोत्तम दिन माना गया है। वहीं इस दिन ब्राम्हणों व जरूरतमंदों को दान करने की विधि तो हर कोई करता है।

इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण होता है। विवाहित बेटियों के घर पर भी मटका दान करता है। ऐसा माना जाता है कि बेटियों को दान करने से घर में सदैव ही खुशहाली आती है। वैसे भी पुराणों में पानी पीलाने का महत्व बताया गया है।

विवाह के बाद भी बेटियों को देते है महत्व

प्रदेश में बेटियों को विवाह के बाद भी महत्व दिया जाता है। हर छोटे-बड़े काम में उनकी सहभागिता होती है। सुख हो या दुख उनके बिना कोई भी कार्य नहीं किया जाता है। तीजा पर्व से लेकर के अक्षय तृतीया के पर्व हर समय बेटियों को याद करने की परंपरा है। छत्तीसगढ़ में यह परंपरा सदियों पुरानी है। जिसे आज भी लोग निभाते है।

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