पितृ पक्ष श्राद्ध में मातृ नवमीं का खास महत्व, हर इच्छा होती है पूरी, जाने महत्व

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पितृ पक्ष में श्राद्ध व तर्पण के माध्यम से पूर्वजों का आहवान कर उनकी आत्मा के मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाती है। पितृ पक्ष में प्रत्येक तिथि का महत्व माना गया है। मृत्यु के तिथि के मुताबिक ही पितरों का तर्पण व श्राद्ध कर्म किया जाता है।

इन सब तिथियों में सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। मातृ नवमीं लेख से हम इसकी विस्तार से जानकारी देंगे।

नवमीं के दिन परिवार की सभी मातृ पितरों का श्राद्ध व पूजन किया जाता है। आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की नवमीं तिथि को मातृ नवमीं का श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में नवमीं की तिथि बहुत खास मानी जाती है।

इस बार श्राद्ध पक्ष में मातृ नवमीं 11 सितंबर को है। इस दिन परिवार की उन सभी महिलाओं की पूजा की जाती है जिनकी मृत्यु हो गई हो। उनके नाम से श्राद्ध भोज किया जाता है।

मातृ नवमी का महत्व

श्राद्ध में मातृ नवमी के दिन माताओं की पूजा होती है। इसलिए इस दिन का खास महत्व है। मान्यता है कि मातृ नवमीं का श्राद्ध कर्म करने से जातकों की सभी इच्छाएं पूरी होती है। शास्त्रों के अनुसार मातृ नवमीं का श्राद्ध करने वालों को धन, संपत्ति, ऐश्वर्य प्राप्त होता है।

उनका सौभाग्य हमेशा बना रहता है। मातृ नवमीं श्राद्ध के दिन घर की बहुओं को उपवास रखना चाहिए। इस श्राद्ध को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है। इस दिन गरीबों अथवा ब्राम्हणों को भोजन कराने से सभी मातृ शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

ऐसे करे मातृ नवमी का श्राद्ध

सुबह स्नान करने के बाद घर की दक्षिण दिशा में हरा वस्त्र बिछाकर सभी पूर्वज-पितरों के फोटो या प्रतीक रूप में एक सुपारी हरे वस्त्र में स्थापित करे। पितरों के निमित्त, तिल के तेल का दीपक जलाएं। सुगंधित धूप जलाए, जल में मिश्री तिल मिलाकर तर्पण करे।

इस दिन परिवार की पितृ माताओं का विशेष श्राद्ध करे। आटे का एक बड़ा दीपक जलाए। पितरों की तस्वीर पर तुलसी की पत्तियां अर्पित करनी चाहिए। जातक को भगवत गीता के नौवें अध्याय का पाठ भी करना चाहिए।

गरीबों या ब्राम्हणों को लौकी की खीर, पालक, मूंगदाल, पूड़ी-सब्जी, फल, लौंग इलायची व मिश्री के साथ भोजन दे। भोजन कराने के बाद धन-दक्षिणा देकर इन सभी को विदा करे।

होती है सभी इच्छाएं पूरी

मातृ नवमी का खास महत्व इसलिए है कि इस दिन परिवार की उन तमाम महिलाओं की पूजा की जाती है। उनके नाम से श्राद्ध भोज किया जाता है। जिनकी मृत्यु हो गई हो।

मातृ नवमी के दिन श्राद्ध कर्म करने वाले मनुष्य को पितरों का आशीष मिलता है साथ ही प्रत्येक इच्छा पूरी होती है।

2 COMMENTS

  1. लेख बहुत सुंदर
    इस तिथि में मातृदिवस मनाना चाहिये
    मेरा ऐसा मत है
    🙏माँ🙏

  2. बहुत ही सुन्दर तरीके से अपने पितृपक्ष का वर्णन किया है।

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