राम भक्त हनुमान को प्रसन्न करना है तो करे हनुमान चालीसा का पाठ, जाने कैसे

3

भगवान राम में परम भक्त हनुमान को माना गया है। भगवान राम की आराधना करते हुए जो व्यक्ति हनुमान का नाम नहीं लेता या उन्हें याद नहीं करता है। उससे भगवान राम प्रसन्न नहीं होता है। माना गया है कि राम भक्ति करने वाले को हनुमान की भक्ति भी करनी होती है। इतना ही नहीं पुराणों में उल्लेख भी है कि हनुमान की पूजा करने मात्र से भी प्रभु श्री राम प्रसन्न हो जाते है।
हनुमान जी की पूजा मंगलवार को सबसे खास मानी गई है। इसके साथ ही इनके भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते है। इस लेख के माध्यम से हम हनुमान चालीसा के महत्व को बताएंगे। साथ ही हनुमान चालीसा पढ़कर जीवन में सुख-समृद्धि कैसे आती है इसकी भी जानकारी देंगे।

तुलसीदास ने की थी हनुमान चालीसा की रचना

हनुमान चालीसा की प्रत्येक चैपाई को मंत्र के रूप में माना गया है। हनुमान चालीसा का पाठ नित्य भी किया जा सकता है। लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ मंगलवार के दिन करना बहुत ही मंगलकारी व पुण्यदायी माना जाता है। हनुमान चालीसा की रचना कवि तुलसीदास ने की थी। चालीस छंद होने के कारण इसे चालीसा कहा जाता है। हर छंद का अपना अलग विशेष महत्व है।

मनुष्य के मन में नहीं आती नकारात्मकता

हनुमान चालीसा व्यक्ति को उसके अंदर छिपे गुणों के बारे में जानने के लिए प्रेरित करता है। इसका पाठ करने से बल, बुद्धि का विकास होता है। व्यक्ति में शक्ति का संचार होता है। किसी भी नए कार्य को करने से पूर्व अगर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो उस कार्य के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। हनुमान जी अपने भक्तों पर कष्ट नहीं आने देते हैं और अपना आशीर्वाद बनाए रखते है। हनुमान चालीसा की सबसे खास बात ये है कि इसे पढ़ने से जीवन में नकारात्मकता नहीं आती है और सकरात्मक उर्जा का अहसास होता है। व्यक्ति का मस्तिष्क मानव कल्याण के तरफ अग्रसर होता है।

शनि व मंगल की अशुभता होती है दूर

जन्म कुंडली में जब शनि और मंगल ग्रह अशुभ फल प्रदान करने लगे तो हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे इन ग्रहों की अशुभता दूर होती है और ये शुभ फल प्रदान करने लगते है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि प्रसन्न होते है।

इस समय करे हनुमान चालीसा का पाठ

हनुमान चालीसा का पाठ करने का सबसे उत्तम समय सुबह व शाम है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से पहले स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है। हनुमान चालीसा का पाठ सिर्फ पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं व कन्याएं भी कर सकती है। भगवान सभी से प्रसन्न होते है। ब्रम्हचारी जरूर थे हनुमान लेकिन उनकी पूजा कभी भी निषेध नहीं मानी जाती है। बस लड़कियां या महिलाएं उनका स्पर्श न करे और न ही दंडवत प्रणाम करे। दूर से आरती व पूजन कर प्रणाम अवश्य ही कर सकती है।

3 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here