राहू के प्रकोप से बचना है तो रखे, इन बातों का ध्यान

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वास्तुशास्त्र का संबंध नैसर्गिक ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल से है वास्तु के अनुसार नैरवत्य कोण यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा छाया ग्रह राहू की होती है। इस दिशा में की गई छोटी भूल भी बड़े अवरोध को खड़े कर सकती है। जिससे जीवन में बहुत सी परेशानियां आती है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि राहू का प्रकोप खतरनाक होता है। ऐसे में वास्तुशास्त्र में राहू के प्रकोप से बचने दिशा बताए है जो इस लेख के माध्यम से बताया जाएगा।

दिशाओं को रखे खास ख्याल

वास्तुशास्त्र में दक्षिण-पश्चिम दिशा को घर मालिक के शयन कक्ष का स्थान माना जाता है। अर्थात मुखिया की शांति में राहू की शुभता का खासा महत्व माना जाता है। राहू ठीक होने से नींद अच्छी आती है। इससे ऊर्जा से भर दिन बनता है।

राहू की खराबी की स्थिति में नींद, स्वास्थ्य, आकस्मिक, अवरोध और अनिर्णय की स्थिति बनती है। इससे उन्नति का मार्ग प्रभावित होता है।

नैरक्त्य कोण में स्थिर एवं भारी वस्तुओं को रखा जाता है। इस दिशा में हल्की और चलायमान वस्तुओं को रखने से बचे। हवा के लिए खिड़की आदि से बचे।

दक्षिण-पश्चिम दिशा में जल निकासी, सीढ़ी और जलभराव आदि नहीं होना चाहिए। इससे घर में सुख-सौभाग्य के धन संचय में कमी आती है। महालक्ष्मी की कृपा कम होती है।

राहू की दिशा का भू भाग भवन के अन्य सभी स्थानों से ऊंचा होना चाहिए। निचला होने पर राहू का प्रकोप बढ़ जाता है। अप्रत्याशित घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इसे ऊंचा करके ठीक किया जा सकता है।

राहू को छाया ग्रह कहा जाता है। इस दिशा में सूरज का प्रकाश नहीं पहुंचता है। यह स्थान उजले रंगों की अपेक्षा गहरे रंगों से निखरता है। अलमारी जैसी भारी वस्तुएं इसी दक्षिण-पश्चिम में रखना शुभ होता है।

इस दिशा में मुख्य द्वार भी नहीं होना चाहिए। हालांकि काॅलोनी में सामने घर हो तो यह दोष कम हो जाता है। खुले मैदान में इस दिशा में दरवाजा बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

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