शुभ प्रभाव चाहिए तो शनिदेव पर अर्पित करे भगवान विष्णु का मैल, कैसे जाने इस लेख में

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शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा के लिए खास माना जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभाव को कम करने व उनका आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए कई तरह के पूजा किए जाते है। भगवान विष्णु का मैल अर्पित करने से शनि देव शुभ प्रभाव देते है।

इस लेख के माध्यम से हम भगवान विष्णु के मैल के विषय में बताएंगे। साथ ही शनि के शुभ प्रभाव के लिए क्या करे। इसकी जानकारी देंगे। जिससे शनिदेव प्रसन्न होकर जीवन को सुखमय बना देते है।

क्या विष्णु का मैल

गरूड़ पुराण में भगवान विष्णु के मैल के तौर पर कुछ और नहीं बल्कि तिल को बताया गया है। भगवान विष्णु के शरीर के मैल से ही तिल बना है। भगवान विष्णु सभी देवी-देवताओं के प्रिय है।

ऐसे में पूजा के लिए अक्सर ही काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। खास तौर पर शनि देव को शनिवार के दिन काला तिल अर्पित करने से वे शुभ प्रभाव देते है।

तिल का तेल भी प्रिय शनि को

तिल का तेल चढ़ाने का धार्मिक महत्व पुराणों में बताया गया है। पुराणों में दिए गए कथा के मुताबिक हनुमान जी पर जब शनि की दशा प्रारंभ हुई उस समय समुद्र पर राम सेतु बांधने का कार्य चल रहा था। राक्षस पुल को हानि न पहुंचाए। यह आशंका सदैव बनी हुई थी।

पुल की सुरक्षा का दायित्व हनुमान को सौंपा गया था। शनिदेव हनुमान जी के बल और कीर्ति को जानते थे। उन्होंने पवनपुत्र को शरीर पर ग्रह चाल की व्यवस्था के नियम को बताते हुए अपना आशय बताया। हनुमान जी ने कहा कि वे प्रकृति के नियम का उल्लंघन नहीं करना चाहते है।

लेकिन राम सेवा उनके लिए सर्वोपरि है। उनका आशय था कि राम काज होने के बाद ही शनिदेव को अपना पूरा शरीर समर्पित कर देंगे। परंतु शनिदेव ने हनुमान जी का आग्रह नहीं माना। वे अरूप होकर जैसे ही हनुमान जी के शरीर पर आरूढ़ हुए।

हनुमान जी ने विशाल पर्वतों से टकराना शुरू कर दिया। शनिदेव शरीर पर जिस अंग में आरूढ़ होते महाबली हनुमान जी उसे ही कठोर पर्वत-शिलाओं से टकराते। जिसके कारण शनिदेव बुरी तरह से घायल हो गए। उनके शरीर पर एक-एक अंग आहत हो गया।

शनिदेव जी ने हनुमान जी से अपने किए की क्षमा मंागी। हनुमान जी ने शनिदेव से वचन लिया कि वे उनके भक्तों को कभी कष्ट नहीं पहुंचाएंगे। आश्वस्त होने के बाद रामभक्त हनुमान कृपा करते हुए शनिदेव को तिल का तेल दिया।

जिसे लगाते ही उनकी पीड़ा शांत हो गईं। तब से शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उन पर तिल के तेल से अभिषेक किया जाता है।

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