भगवान श्री राम मर्यादापुरुषोत्तम कैसे बने, जाने यहां

1

श्री राम को मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहा जाता है। पुराणों में लिखा है कि श्री राम के रूप में भगवान विष्णु ने ही धरती पर जन्म लिया था ताकि संत जनों पर बढ़ रहे राक्षसी अत्याचार को खत्म किया जा सके। भगवान श्री राम को आदर्श बेटा, आदर्श भाई कहा जाता है। भगवान राम एक आम इंसान की तरह ही अवतरित हुए थे। उन्होंने हर तरह के कष्ट सहे और अपने जीवन को सही तरह व्यतीत किया। आम इंसान से मर्यादापुरुषोत्तम श्री राम बनने तक की कहानी हम इस लेख के माध्यम से बताएंगे।

इस तरह हुआ श्री राम का जन्म

भगवान श्री राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमीं को गुरु पुष्य नक्षत्र, कर्क लग्न में अयोध्या के राजा दशरथ के घर हुआ। दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या के पुत्र के रूप में राम जन्मे और समस्त ऋषि-मुनियों के जीवन में राक्षसी अत्याचारों का अंत हुआ। श्री राम की जन्म कुंडली बताती है कि उनकी कुंडली में उच्च ग्रहों का अप्रत्याशित योग ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम बनाता है। दरअसल राम को विष्णु के सातवें अवतार के रूप में जाना जाता है। इस अवतार में विष्णु ने सामान्य मानस की तरह व्यवहार किया और समाज में रहे। बिना किसी चमत्कारिक शक्ति के राम ने एक आम इंसान की तरह ंिजंदगी व्यतीत की और सामान्य जन मानस के लिए नए उदाहरण स्थापित किए।

आदर्श माने जाते है राम

देखा जाए तो राम ने किसी भी लीक को नहीं तोड़ा। वो एक आदर्श व्यक्ति के तौर पर समाज के हर वर्ग और व्यक्ति के साथ खड़े दिखे। भरत और शत्रुघ्न के लिए आदर्श भाई के रूप में श्री राम दिखे। पिता के लिए आदर्श बेटा बनकर राम ने नई सुकीर्ति गढ़ जिसके तहत कहा गया कि प्राण जाए पर वचन न जाए। पिता की बात को रखने के लिए राम ने वनगमन तक किया और अनेक दुख सहे और नए समाज को भी इससे प्रेरणा मिली। प्रजा के लिए राजा सदैव नीति कुशल राजा के तौर पर दिखे। जनता की रक्षा करनी हो या नए समाज की परिकल्पना राम ने सदैव उच्च विचारों से प्रेरित होकर न्याय प्रिय राजा के जैसा व्यवहार किया। तभी तो राजतिलक से पहली ही राम को वनवास का आदेश मिला तो पूरी अयोध्या नगरी रो पड़ी।

भावनात्मक भाई बने लक्ष्मण के

लक्ष्मण सदैव राम के लिए चहेते भाई की तरह रहे। वो जब मेघनाद के वार से अचेत हुए तो सबसे पहले राम ही घबराकर रूदन करने लगे थे। तब व्याकुल और अधीर भाई की छवि राम के भीतर दिखाई दी। जिसे लौटकर पिता और भाई की पत्नी को जवाब देना था।

सुग्रीव के परम मित्र

सुग्रीव के लिए राम एक परम मित्र की तरह दिखे। सुग्रीव के हित के लिए राम ने जंगल नियम को अपनाया और उनकी सहयाता की। सुग्रीव और बाली के यु़द्ध के समय राम ने बाली का वध किया। लोग इसे छल कहते है लेकिन जंगल नियमों के मुताबिक यह सही था।

विभीषण के लिए परम सहायक

राम जानते थे कि विभीषण हर अवस्था में उनका साथ देंगे। लेकिन सके लिए राम ने प्रतीक्षा की। रावण की मृत्यु का भेद जानकर रावण का वध करके राम चाहते तो लंका पर भी राज कर सकते थे लेकिन उन्होंने दोस्ती और सहायता का सही प्रतिउत्तर दिया और विभीषण को लंका का राज सौंप कर लौट आए।

एक बेहतर विद्यार्थी

श्री राम ने ही उदाहरण स्थापित किए कि कोई व्यक्ति हमेशा संपूर्ण ज्ञानी नहीं हो सकता। उन्होंने कई मौकों पर शिक्षा देने वाले शिक्षको का सम्मान किया। जब रावण की मृत्यु हुई तो श्री राम उसके चरणों की तरफ बैठे और रावण से ज्ञान लिया। उन्होंने लक्ष्मण से भी यही कहा कि जब ज्ञानी ज्ञान दे तो उसे शिरोधार्य जरूर करना चाहिए।

जात-पात के खिलाफ उदाहरण

श्री राम ने जात-पात के भेद को खत्म करने का कार्य किया। उनके मित्र गुह निषाद राज रहे। वहीं शबरी के जुठे बेर भी बड़े चाव से खाए। उन्होंने कभी भी जात-पात का अंतर नहीं किया। वे जात-पात को खत्म करने का महान कार्य भी किया।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here