कुंडली में कैसे बनता है राजयोग, जाने कौन सा ग्रह बना सकता है किस राशि को राजा

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ज्योतिषशास्त्र में ग्रह-नक्षत्र, तिथि, वार प्रत्येक का विशेष महत्व माना जाता है। सही समय व्यक्ति को सफल राह में ले जाती है। इसके पीछे उसके कुंडली को प्रभावित करने वाले कारक ग्रहों का महत्वपूर्ण हाथ माना जाता है।

इस लेख के माध्यम से हम बताएंगे कि किस राशि में कौन सा ग्रह राजयोग उत्पन्न करता है और कैसे राजा बना सकता है। प्रत्येक राशि के लोगों में राजयोग बनता है लेकिन उसके लिए ग्रह नक्षत्र उसे प्रभावित करते है।

ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने बताया कि कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों की चाल से जातक के वर्तमान और भविष्य का पता चलता है। कुंडली में नौवें स्थान को भाग्य और दसवें भाव को कर्म का स्थान माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र में कुंडली के नौवें और दसवें स्थान पर ग्रहों की स्थिति सही होने पर राजयोग बन सकता है। कहते है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग बनता है उसे सभी सुख प्राप्त होते है।

सभी राशियों में ऐसे बनता है राजयोग

1.मेष लग्न की कुंडली में अगर मंगल ग्रह और बृहस्पति ग्रह नौवें और दसवें भाव में होते है तो यह स्थिति कुंडली में राजयोग का निर्माण करती है।

2.वृष राशि के जातक की कुंडली में नौवें और दसवें भाव में शुक्र और शनि ग्रह मजबूत स्थिति में होते है। ऐसे में जातक की कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है।

3.मिथुन लग्न की कुंडली में जब बुध और शनि ग्रह नौवें और 10वें भाव में एक साथ होते है तो कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है। ऐसे लोग राजा के समान जीवन जीते है।

4.कर्क लग्न वाले जातकों की कुंडली में जब चंद्रमा और बृहस्पति भाग्य और कर्म भाव में होते है तो यह राजयोग का कारक होता है। ऐसे लोगों के पास किसी चीज की कमी नहीं रहती है।

5.सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य और मंगल नौवें और दसवें भाव में अच्छी स्थिति में होते है तो कुंडली में राजयोग का निर्माण होता है।

6.कन्या लग्न के जातकों की कुंडली में जब बुध और शुक्र भाग्य और कर्म भाव में एक साथ विराजमान होते है तो राजयोग का निर्माण होता है।

7.तुला लग्न के लोगों की कुंडली में शुक्र और बुध नौवें और दसवें भाव में एक साथ आ जाते है तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सुख मिलते है

8.वृश्चिक लग्न वालों की कुंडली में अगर सूर्य और मंगल ग्रह नौवें और दसवें स्थान पर एक साथ होते है तो राजा के समान सुख प्राप्त करता है। कुंडली में चंद्रमा और मंगल के मजबूत स्थिति में होने पर शुभ फल की प्राप्ति के योग बनते है।

9.धनु लग्न वालों के लिए बृहस्पति और सूर्य अगर नौवें या दसवें भाव में एक साथ होते है तो इस स्थिति में कुंडली में राजयोग बनता है।

10.मकर लग्न के जातकों की कुंडली में जब शनि और बुध एक साथ कर्म या भाग्य भाव में मौजूद होते है तो कुंडली में राजयोग कारक बनता है।

11.कुंभ लग्न के जातकों की कुंडली में जब शुक्र और शनि ग्रह भाग्य और कर्म भाव में उपस्थित होते है तो ऐसे लोगों का जीवन राजा के समान बीतता है।

12.मीन लग्न के लोगों की कुंडली में जब गुरु और मंगल नौवें और दसवें भाव में एक साथ उपस्थित होते है तो यह स्थिति राजयोग बनाती है।

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