विघ्नहर्ता श्री गणेश का कैसा है परिवार, जाने इस लेख में

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गौरी पुत्र गणेश को सभी प्रथम पूज्य मानते है साथ ही उन्हें बल, बुद्धि व विघ्नों को दूर करने वाले देव के रूप में भी जाना जाता है। भगवान गणेश के माता-पिता मां पार्वती व भगवान शंकर के बारे में तो सभी जानते है। लेकिन उनका परिवार बड़ा और प्रत्येक सदस्य पूजनीय है। इस बात को कम लोग ही जानते है। इस लेख के माध्यम से हम विघ्नहर्ता श्री गणेश के पूरे परिवार के विषय में बताएंगे।

भगवान गणेश के माता-पिता महादेव व गौरी है। वहीं उनके एक भाई भगवान कार्तिकेय है तो बहन के तौर पर अशोक संुदरी को जाना जाता है। महादेव का ही एक ऐसा परिवार है जिनके परिवार के प्रत्येक सदस्य की पूजा होती है। यह परिवार आदर्श परिवार के तौर पर जाना जाता है।


श्री गणेश की है दो पत्नी रिद्धि-सिद्धि

भगवान गणेश को तुलसी देवी से जो श्राप मिला था उसके कारण ही श्री गणेश की दो पत्नी हुई। जिनका नाम रिद्धि व सिद्धि है। ब्रम्हा ने दो कन्याओं रिद्धि-सिद्धि का सृजन किया था और भगवान गणेश से उनका विवाह करवाया। ये दोनों ब्रम्हा जी के योग में लीन होने से अवतरित हुई थी। इसलिए इन्हें ब्रम्हा की मानस पुत्री कहा जाता है।

शुभता के प्रतीक है पुत्र शुभ-लाभ

किसी भी मांगलिक कार्य में, घरों के द्वार पर, पूजा घर में, धार्मिक तस्वीरों, पोस्टरों में अक्सर ही शुभ व लाभ लिखा हुआ देखने को मिलता है। ये शुभ व लाभ शुभता के प्रतीक माने गए है। विघ्नहर्ता के दो पुत्र शुभ व लाभ है और इनका जन्म रिद्धि-सिद्धि के द्वारा हुआ है। शास्त्रों के अनुसार शुभ और क्षेम भगवान गणेश की संताने है जिन्हें शुभ व लाभ कहा जाता है।

गणेश परिवार की होती है पूजा

भगवान गणेश जहां विघ्नहर्ता है वहीं रिद्धि-सिद्धि से विवेक और समृद्धि मिलती है। शुभ और लाभ घर में सुख-सौभाग्य लाते है। समृद्धि को स्थायी और सुरक्षित बनाते है। सुख-सौभाग्य की चाहत पूरी करने के लिए बुधवार को भगवान गणेश के पूरे परिवार की पूजा करना पुण्यदायी होता है।

शिव परिवार है आदर्श

देवताओं में सभी देवी-देवताओं के परिवार है लेकिन शिव परिवार ही एक ऐसा परिवार माना जाता है जिनके प्रत्येक सदस्य को पूजनीय माना जाता है। महादेव व मां पार्वती तो शिव-शक्ति के रूप में प्रसिद्ध है। वहीं गणेश व कार्तिकेय भी पूजनिय है। इनके साथ ही रिद्धि-सिद्धि व शुभ-लाभ भी पूजे जाते है। इसलिए इनका परिवार एक आदर्श परिवार है। इस परिवार की जिस भी घर में पूजा होती है वहां पर परिवार में खुशहाली व समृद्धि होती है।

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