होली पर्व 29 मार्च को मनाया जाएगा, जाने होली पर्व मनाने की पौराणिक कथा व महत्व

1

होली रंगों का त्योहार है। फाल्गुन मास के पूर्णिमा की तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। रंग-गुलाल के साथ ही होली है कहते हुए लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हुए आपसी बैर भूलकर स्नेह व्यक्त करते है। कई त्योहारों की तरह ही होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद मनोज तिवारी ने इस त्योहार को महत्वपूर्ण बताते हुए इसके पीछे की पौराणिक कथा का उल्लेख इस लेख में किया है।

होली की पौराणिक कथा

हिरण्यकश्यप् प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई हिरण्याक्ष की मौत का बदला लेना चाहता था। जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए उसने सालों तक तपस्या की। आखिरकार उसे ब्रम्हाजी ने वरदान दिया।

लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा। इस दुष्ट हिरण्यकश्यप का एक बेटा प्रहलाद था। वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी भी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा।

बेटे द्वारा अपनी पूजा करने से नाराज उस हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे को मराने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी । उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी।

लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद भगवान श्रीहरि विष्णु का परम भक्त था और उसे भगवान पर अटूट विश्वास था कि भगवान उसकी रक्षा करेंगे और ऐसा ही हुआ भगवान विष्णु ने होलिका के गोद में बैठे प्रहलाद को बचा लिया और होलिका का वरदान श्राप बन गया और वह ही आग में भस्म हो गई। होलिका की मौत के बाद बुराई नष्ट हो गई और होली का पर्व मनाया गया।

इस तरह से बने रंग होली का हिस्सा

भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्रीकृष्ण ने रंगों से होली मनाते थे। इसलिए होली का त्योहार रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ। वे वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे। वे पूरे गांव में मजक भरी शैतानियां करते थे।

आज भी वृंदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं नहीं मनाई जाती है। होली बसंत का त्योहार है और इसके आने पर सर्दियां खत्म होती है। कुछ हिस्सों में इस त्योहार का संबंध वसंत की फसल पकने से भी है। किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाते है। होली को बसंत महोत्सव या काम महोत्सव भी कहते है।

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here