यहां मां विराजी है लक्ष्मी के रूप में, कहते है लखनी देवी, जाने मंदिर का इतिहास

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छत्तीसगढ़ प्रदेश अपनी सभ्यता व संस्कृति के लिए तो प्रसिद्ध है साथ ही साथ यहां पर सभी देवी-देवताओं के प्राचीन मंदिर है। जिसे प्राचीन शासकों ने बनवाए है। उन्हीं में से एक खास मंदिर है देवी लक्ष्मी का मंदिर। जिसे देवी लखनी के नाम से जानते है।

यह मंदिर तालाबों की नगरी कहे जाने वाले रतनपुर में पहाड़ों पर है। यह मंदिर प्रदेश का एक मात्र देवी मां लक्ष्मी का मंदिर है। छत्तीसगढ़ की प्राचीन राजधानी कहे जाने वाले रतनपुर में पहाड़ों पर देवी लखनी का वास है।

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यहां पर देवी मां महालक्ष्मी के रूप में विराजमान है। यह मंदिर लखनी देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मां लखनी भक्तों को सुख-संपत्ति व वैभव प्रदान करती है। यहीं वजह है कि यहां एक बार जो भक्त आता है वह बार-बार आता है।

पहाड़ो वाली माता भी कहते है

लखनी देवी का मंदिर कोटा रतनपुर मार्ग पर स्थित इकबीरा या लक्ष्मीधाम पर्वत के नाम से जाना जाता है। यहां पर चारों ओर पेड़ ही पेड़ है और हरियाली के बीच माता का सुंदर सा मंदिर है। पहाड़ में मंदिर होने के कारण लखनी देवी को पहाड़ों वाली माता भी कहते है।

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राजा रत्नदेव तृतीय ने कराया था निर्माण

कल्चुरी वंश के शासक राजा रत्नदेव तृतीय के शासन काल में उनके महामंत्री गंगाधर के मार्गदर्शन में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। मंदिर के निर्माण के पीछे किवदंती है कि 1179 ई में राज्य में महामारी फैली थी। जिसके कारण चारों ओर गरीबी, भूखमरी का सामना प्रजा को करना पड़ा था। तब इस मंदिर का निर्माण कराया गया। विधि-विधान से पूजन करने पर एक बार फिर से राज्य में धन-सम्पदा आई।

पुष्पक विमान की तरह है मंदिर की बनावट

रतनपुर में पहाड़ी पर स्थित मां लखनी देवी के मंदिर की बनावट पुराणों में वर्णित पुष्पक विमान के समान है। जिसे देखकर लोग भी इसकी सत्यता मानते है।

सुख-वैभव प्रदान करती है लखनी देवी

इस मंदिर में दीपावली व अगहन माह में विशेष पूजन होता है। माना गया है कि यहां आकर जो भी मां लखनी ने मांगता है उसकी मुराद मां पूरी करती है।

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