महापुरुषों के वचनों का श्रवण से जीव का क्रमिक विकास पश्चात मोक्ष प्राप्त होता है- जैन मुनि पंथक

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बिलासपुर-महापुरुषों कि वचनों का श्रवण करने से जीव का क्रमिक विकास होते हुए अंत में मोक्ष उपलब्ध होता है । जिन्हें तीन साल और तीन लोक का ज्ञान होता है । उन्हें केवल ज्ञानी कहते हैं, और उनके साथ साथ में जो विशेष प्रमाण में पुण्य साली होते हैं । उन्हें तीर्थंकर भगवान यानी कि महापुरुष गिना जाता है । उक्त बातें टिकरापारा स्थित जैन भवन में चातुर्मास ऑनलाइन प्रवचन में परम पूज्य गुरुदेव पंथक मुनि ने कहीं ।


उन्होंने आगे कहा ऐसे महापुरुषों के वचनों में कतई भी राग द्वेश होता नहीं है । ऐसे वचनों के सामान से जो भी कहा गया है उसे जो व्यक्ति अपने जीवन में अमल करता है या पालन करता है तो ऐसे व्यक्ति को अति दुर्लभ मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है ।
ऐसे वचनों के आचरण से मोक्ष प्राप्ति तक कई चरण रहते हैं, जैसे कि श्रवण से जीव को आत्मिक ज्ञान की उपलब्धि होती है । जो जीव अनादीकाल से आदि काल से अज्ञानी था। उसे आत्मीक ज्ञान प्राप्त होता है और यह भी ज्ञान होता है कि शरीर और संसार के अलावा आत्मा जैसे कि कोई अस्तित्व है ऐसा ज्ञान के बाद में उन्हें विशेष ज्ञान होता है । जिससे समझ में आता है कि शरीर और आत्मा भिन्न.भिन्न है ।


विशेष ज्ञान से अपने सांसारिक जवाबदारी निभाते निभाते अपनी आत्मा के कल्याण के लिए कुछ कार्य करना है । ऐसा भी ख्याल रखना होता है । ऐसे आत्म कल्याण के लिए जो भी पापकारक प्रवृत्ति वाले आचरण होते हैं उन्हें सौगंध पूर्वक बंद करने का सोच आती है । ऐसे पापकारक प्रवृत्ति कम करने के लिए या बंद करने के लिए ऐसी अवस्था में रहने की कोशिश करता है । ऐसी अवस्था इसलिए कि संसार छोड़कर दीक्षा लेना या तो सामायिक करते रहना ।


ऐसे त्यागमय जीवन से और संयमित जीवन कर्म बंधन होना कम हो जाता है और अपने भूतकाल के अनादिकाल में अज्ञान दशा के कारण बंधे हुए कर्म जो आत्मा के साथ संलग्न हो गया है उन्हें विविध प्रकार के तप से खत्म करेंगे । जो कि कर्म निर्जरा कहा जाता है । इस प्रकार के संयम धारण करने से कर्मों का बंधन बंद होना तप के माध्यम से जो कर्म संचित है । उन्हें खत्म करना जिनकी वजह से आत्मा की जो अनंत काल से संसार की अलग.अलग गलियों में भटकने की क्रिया करता था वह भी अब बंद हो जाएगी । जैसे ही ऐसी क्रिया बंद हो जाएगी तब मोक्ष की प्राप्ति आसानी से हो जाएगी ।

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